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भाषा ही संस्कृति की आत्मा है

मेरी गूँज (गुंजन राजपूत)

  मेरी गूँज (उपन्यास/NOVEL) 'मेरी गूँज' एक ऐसा उपन्यास जिसे पढ़ने वाला लगभग हर व्यक्ति अपनी झलक देख सकता है।  For oder fill fill the link below मेरी गूँज (गुंजन राजपूत) Meri goonj written by Gunjan Rajput
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भाषा ही संस्कृति की आत्मा है

भाषा ही संस्कृति की आत्मा है  संस्कृत एवं हिंदी का महत्व और हमारी कक्षाओं की विशेषता 🌸 भाषा केवल संचार का साधन नहीं होती, बल्कि वह हमारी संस्कृति, सभ्यता और मूल्यों की आत्मा होती है। संस्कृत और हिंदी दोनों ही भारतीय जीवन और विचारधारा की धरोहर हैं। क्यों ज़रूरी है संस्कृत और हिंदी सीखना? 📚 संस्कृत – यह सभी भाषाओं की जननी कही जाती है। इसमें ज्ञान-विज्ञान, साहित्य, दर्शन और संस्कृति का भंडार है। संस्कृत का अध्ययन विद्यार्थी को तार्किक सोच, शुद्ध उच्चारण और गहरी समझ प्रदान करता है। 📚 हिंदी – हमारी राष्ट्रभाषा होने के साथ-साथ संवाद, अभिव्यक्ति और लेखन की सबसे प्रभावी भाषा है। सही हिंदी ज्ञान विद्यार्थियों को न सिर्फ परीक्षा में बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में आत्मविश्वास देता है। हमारी कक्षाओं की विशेषताएँ – Sanskrit & Hindi Knowledge Point 👉 कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों के लिए विशेष मार्गदर्शन 👉 लेखन कौशल, व्याकरण और परीक्षा की संपूर्ण तैयारी 👉 Online एवं Offline दोनों माध्यम उपलब्ध 👉 व्यक्तिगत ध्यान और प्रैक्टिस पर विशेष फोकस 💡 हमारा उद्देश्य केवल अच्छे अंक द...

क्या बोलना मना है? (कविता)

क्या बोलना मना है? क्या बोलना मना है? हाँ???? क्या बोलना मना है? बोलना मना है या फिर....... उस जगह  हाँ उस जगह..... जहाँ तुम बोल रहे हो  अपना दिल खोल रहे हो  बोल-बोलकर ही अपना दिल टटोल रहे हो  वहाँ बोलना मना है  हाँ वहाँ बोलना मना है  हाँ वहाँ बोलना मना है  वो बहुत अच्छा है  तुम्हारे साथ बहुत सच्चा है  लेकिन तुम्हें पूरी तरह समझने में  तुम्हें तुम्हारा पूरा अस्तित्व देने में  अभी वो कच्चा है  ना वो नासमझ है  ना ही वो बच्चा है  तो क्या करें..... तो फिर क्या करें थोड़ा सहते रहें??? ख़ुद का दर्द ख़ुद ही कहते रहें??? या फिर.... या फिर समय की जो धारा है  ये जो नाज़ुक सा रिश्ता हमारा है  जो हमें सबसे अजीज़ सबसे प्यारा है  उसके साथ, समय के साथ बस  यूँ ही बहते रहें??? अगर बस यूँ ही बहते रहे  तो भी बड़ी परेशानी होगी  हमारे साथ बहने में  आँसुओं के बहने की भी कहानी होगी  और जो ये कुछ पल की मिली है  वो कैसी उदासी भरी ज़िंदगानी होगी तो फिर....... तो क्या करना होगा? सहना होगा? या डरना हो...

Class VIII Hindi Bharat Ki Khoj Chapter 2 Talaash (NCERT)

 कक्षा VIII हिंदी पाठ २ तलाश (भारत की खोज) पाठ का सारांश  ‘ तलाश ’ पाठ में पं . जवाहरलाल नेहरू जी ने भारत की आत्मा , संस्कृति और उसकी वास्तविक पहचान को खोजने की प्रक्रिया का विश्लेषण प्रस्तुत किया है । यह केवल एक देश की भौगोलिक खोज नहीं है , बल्कि एक ऐसी यात्रा है , जो भारत के जनमानस , उसकी सोच , परंपराओं , संघर्षों और आत्मा को समझने का प्रयास है । नेहरू जी कहते हैं कि वर्षों बीत जाने के बाद भी उनके मन में भारत की छवि सजीव बनी रही , और समय के साथ यह छवि और भी स्पष्ट होती गई ।   नेहरू जी ने अपनी यात्राओं , अध्ययन और अनुभवों के माध्यम से भारत को जानने की कोशिश की । उन्होंने देखा कि भारत की पहचान केवल उसके ऐतिहासिक भवनों , मंदिरों , मस्जिदों या पुरातात्विक स्थलों तक सीमित नहीं है , बल्कि उसकी असली आत्मा उसकी जनता में बसी है । गांवों में रहने वाले किसान , मजदूर , स्त्रियाँ और आम जनमानस की सादगी , सहिष्णुता और संघर्षशीलता ही भारत की असली शक्ति है । ...