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Class 7 Hindi Bal Mahabharat summary and character introduction (कक्षा 7 हिंदी बाल महाभारत का सारांश तथा पात्र परिचय)

कक्षा 7 के लिए बाल महाभारत का संक्षिप्त सारांश तथा मुख्य पात्रों का परिचय- बाल महाभारत का संक्षिप्त सारांश महाभारत की शुरुआत राजा शांतनु और गंगा के पुत्र भीष्म से होती है। भीष्म ने अपने पिता की इच्छा के अनुरूप वचन लिया था कि वे आजीवन ब्रह्मचारी रहेंगे और हस्तिनापुर के सिंहासन के लिए कभी दावा नहीं करेंगे। गंगा के जाने के बाद शांतनु ने सत्यवती से विवाह किया, जिनसे धृतराष्ट्र और पांडु का जन्म हुआ। धृतराष्ट्र ने अंधेपन के कारण राज्य की गद्दी नहीं संभाली, और पांडु ने राज्य का शासन किया। पांडु के पाँच पुत्र थे, जिन्हें पांडव कहा जाता है—युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव। पांडवों के सगे भाई कौरव थे, जिनकी संख्या १०० थी, और उनका सबसे बड़ा भाई दुर्योधन था। दुर्योधन का मन हमेशा पांडवों से ईर्ष्या और द्वेष से भरा रहता था। दुर्योधन ने छल-कपट से पांडवों को उनके अधिकारों से वंचित कर दिया। उसने अपने मामा शकुनि की सहायता से जुए का षड्यंत्र रचा, जिसमें पांडव अपना सारा राजपाट हार गए। उन्हें तेरह वर्षों का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास भोगने के लिए विवश किया गया। जब अज्ञातवास समाप्त होने के बाद पा...

Class 7 Hindi Ch 12 Bhor aur barkha (कक्षा VII हिंदी पाठ 12 भोर और बरखा)

Class 7 Hindi Ch 12 Bhor aur barkha (कक्षा VII हिंदी पाठ 12 भोर और बरखा) अभ्यास प्रश्न  प्रश्न 1-  ' बंसीवारे ललना' ‘मोरे प्यारे लाल जी’ कहते हुए, यशोदा किसे जगाने का प्रयास करती हैं और कौन-कौन-सी बातें कहती हैं? उत्तर 1-  ' बंसीवारे ललना' ‘मोरे प्यारे लाल जी’ कहते हुए, यशोदा श्री कृष्ण को जगाने का प्रयास करती हैं। वे निम्न बातें कहती हैं-  मेरे प्यारे लाल अब उठ जाओ। रात बीत चुकी है सुबह हो चुकी है। सभी ने अपने घर के दरवाज़े खोल दिए हैं, गोपियों के कंगनों की आवाज़ आ रही है वे दही मथ रही हैं, तुम्हारे दर्शन के लिए देवता और मनुष्य द्वार पर खड़े हैं। उठ जाओ मेरे पुत्र तुम्हारे मित्र हाथ में माखन-रोटी लिए तुम्हें बुला रहे हैं।  प्रश्न 2-  नीचे दी गई पंक्ति का आशय अपने शब्दों में लिखिए- ‘माखन-रोटी हाथ मँह लिनी, गउवन के रखवारे।’   उत्तर 2- उपर्युक्त पंक्ति का आशय है कि गायों को चराने वाले ग्वाले मित्र हाथ में माखन-रोटी लेकर तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे हैं।  प्रश्न 3-  पढ़े हुए पद के आधार पर ब्रज की भोर का वर्णन कीजिए। उत्तर 3- ब्रज की भोर में गवालनें...

अलविदा 2024

2024 अलविदा  2024 अब तुम्हारे जाने का समय आ चुका है। तुम्हें अलविदा कहते हुए इस वर्ष का आखिरी लेख लिख रही हूँ- हम सभी जानते हैं कि समय कभी रुकता नहीं है, वह हमेशा चलायमान रहता है। इस बात का सबसे अधिक अहसास किसी वर्ष के समाप्त होने पर होता है। ये समय ऐसा होता है जब हम चाहे अनचाहे अपने बीते 12 महीनों को याद करते हैं। हमारे साथ हुए अच्छे-बुरे कामों को याद करते हैं। अपनी निजी परिस्थितियों को याद करते हैं। सबसे अधिक हम जो याद करते हैं वो होता है-  हमारे छूटे हुए काम, हमारे अधूरे काम, हमारी अधूरी इच्छाएँ इन सबको याद करते हुए हमारे अंदर कहीं न कहीं एक नकारात्मकता पैदा होने लगती है। और जल्दी ही अगर इस नकारात्मकता को रोकने का प्रयास न किया जाए तो ये बढ़ती रहती हो और कई तरीक़ों से आने वाले समय को भी खराब कर देती है।  कई बार देखा जाता है कि पहले जो लोग साल की शुरुआत में ढेरों लक्ष्य बनाते थे वो अब लक्ष्य अधूरे रहने पर नए लक्ष्य बनाना छोड़ देते हैं। सिर्फ इस डर से क्योंकि उनके मन के किसी कोने में ये विश्वास जड़ जमा लेता है कि वो जो भी लक्ष्य बनाएँगे वो पूरा नहीं कर पाएँगे। ...

दिल चाहता है

Good Night thought बहुत से लोग बहुत सी बातों को दिल ही दिल में दबा कर रखते हैं। उन्हें पता है कि उन्हें क्या करना है, क्या खाना है, कहाँ जाना है, किसके साथ आगे रिश्ते बनाए रखने हैं और किसके साथ उनके रिश्ते अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। उन्हें सब पता होता है और उनका दिल चाहता है कि वो किसी की भी परवाह किए बग़ैर सिर्फ अपने दिल की सुनें और आगे बढ़ें लेकिन पता नहीं कौन सी ऐसी चीज़ होती है जो उन्हें रोक लेती है और उनके दिल के न चाहने पर भी उन्हें वो काम करने के लिए धकेलती रहती है। ये सब कुछ दिन या कुछ महीनों की बातें हैं आख़िर में हमें दिल को ही खुश रखना है क्यूँकि दिल जहाँ खुश वहाँ हम खुश। तो फिर सब जगह से हारने के बाद, दिल को तुड़वाने के बाद ही सबक़ लेना ज़रूरी है क्या? नहीं। बिलकुल भी नहीं। दिल जो चाहता है वो सही है। उसे करो। आगे बढ़ो। अगर आपके दिल को खुश करने में, उसकी मानने में किसी के साथ कुछ गलत नहीं होता तो क्या परेशानी है दिल कि सुनने में? इसी बात पर एक लाइन लिखने का मन कर रहा है कि- तू ख़ुद को खुश रख 'बंदे', दिल को दर्द देने को दुनिया काफ़ी है ग़ैरों की ख़ातिर ख़ुद...

मेरी गूँज (गुंजन राजपूत)

  मेरी गूँज (उपन्यास/NOVEL) 'मेरी गूँज' एक ऐसा उपन्यास जिसे पढ़ने वाला लगभग हर व्यक्ति अपनी झलक देख सकता है।  For oder fill fill the link below मेरी गूँज (गुंजन राजपूत) Meri goonj written by Gunjan Rajput

यादों में रहना। कविता। live in memories। Old memories

यादों के साए में जाना  क्या सुकून देता होगा उसे हरदम याद करना क्या सही होता होगा उसके लिए खुद को बरबाद करना वो साथ नहीं तुम्हारे तुम जानते हो वो साथ नहीं तुम्हारे तुम जानते हो तो क्या मुनासिब है उसकी याद में तुम्हारा हर साँस भरना क्या वाकई इतना मुश्किल है एक नई शुरुआत करना Instagram:gunjanrajput youtube:gunjanrajput pratilipi:gunjanrajput twitter:gunjanrajput

तुम लड़की हो इंसान नहीं। कविता। girl's poetry।

तुम लड़की हो इंसान नहीं  आज भी कई लोगों का मानना ये है कि लड़कियों के साथ जो दुष्कर्म होते हैं उनमें लड़कियों की गलती होती है। वो ही लड़कों को हवा देती हैं। इसी पर एक व्यंग्य लिखने का प्रयास👏👏👏 तुम लड़की हो इंसान नहीं  क्यूँ इतना हँसती-मुस्कुराती हो क्यूँ जीन्स पहन कर बाहर जाती हो क्यूँ लड़कों को दोस्त बनाती हो क्यूँ खुद को उनके बराबर का जताती हो क्यूँ नहीं तुम थोड़ा शर्माती हो क्यूँ हँस-हँस बाहर चाट खाती हो क्यूँ खूबसूरत बन कर इठलाती हो क्यूँ ज्यादा समझदारी दिखाती हो क्यूँ नहीं तुम खुद को समझाती हो कि बस एक 'लड़की' हो 'औरत' हो 'नारी' हो तुम तुम 'आदमी' नहीं, तुम 'इंसान' नहीं जो उनके जैसे संसार में खुल के जीना चाहती हो ऐसी इच्छाएँ करोगी अगर वो तो मचलेंगे न तुम हवा दोगी अगर वो तो बहकेंगे न दुनिया की सलाह मान क्यूँ नहीं लेती उसे अपने जीवन में ढाल क्यूँ नहीं लेती समान जीवन पाने की मूर्खता भरी इच्छा छोड़ क्यूँ नहीं देती नहीं तो इस जीवन से मुँह मोड़ क्यूँ नहीं लेती आखिर क्यूँ???? Instagram:gunjanrajput youtube:gunjanrajput pratilipi:gunjanrajput twitter:gun...

एक लेखक का सपना । writer dream ।

एक लेखक का सपना   कुछ लिख दूँ ऐसा कि कलम को पहचान मिल जाए रचनाओं की बगिया में मेरी कविता भी खिल जाए परिवर्तन तो अटल नियम है इस पूरे संसार का ही परिवर्तन के सागर में मेरी शब्द बूँदें भी मिल जाएँ प्रेम व्यवहार में टूटते रहते हैं रोज़ कई-कई दिल किसी दिल को मेरे शब्दों से कुछ राहत मिल जाए प्रेमी को पत्र भेजने प्रेमिका बैठे जब सोच आँगन में मेरी कोई रचना भेजने को उसके दिल को भा जाए पर्व त्यौहारों को मनाने की संस्कृति रही है सदा हमारी किसी पर्व में मेरी रचना का भी एक त्यौहार मन जाए बच्चा सुनाने कविता को पलटे कविताओं के पन्ने जब मेरी किसी कविता पर फिसल उसकी उंगली थम जाए मैं गीत लिखूँ, कविताएँ लिखूँ, लिख दूँ कुछ कहानियाँ भी कवियों-लेखकों की गोष्ठी में मेरा भी थोड़ा नाम हो जाए लेखनी को शक्ति मिले, मैं लिख दूँ चुन-चुन हर विषय पर विषय खतम होने से पहले मेरी 'गूँज' खतम न हो जाए Instagram:gunjanrajput youtube:gunjanrajput pratilipi:gunjanrajput twitter:gunjanrajput  

एक लड़की भीगी-भागी सी

  वेद ऑफिस से घर के लिए निकल चुका था, बारिश का मौसम था तो इन दिनों वो यही कोशिश करता कि समय से घर के लिए निकल जाया करे क्योंकि मौसम का कोई भरोसा नहीं। घर जाने के रास्ते में एक कैफे था जिसमें वेद अक्सर कॉफी पीने के लिए जाया करता था। मौसम की ठंडक और बारिश की बुहारों को देखकर उसका मन हुआ कि कॉफी पी ली जाए। कैफे में पहुँचा अपनी पसंदीदा टेबल पर बैठकर काफी का ऑर्डर दिया और हेडफोन्स से गाने सुनने लगा। वही पुराने गाने 19 के शतक के। गाने सुनते-सुनते नज़र बाहर गई तो देखा बारिश बढ़ गयी है। उसकी नज़र उसकी गाड़ी की तरफ गई तो देखा एक लड़की वहाँ गाड़ी के पीछे हल्के गुलाबी सूट में दुपट्टे से अपना सर ढके आते जाते ऑटो को रोकने की कोशिश कर रही है। वेद का ध्यान गया कि वहाँ पीछे इतनी जगह है कि वो वहाँ खड़े रह कर इंतज़ार कर सकती है पर फिर भी वो बारिश में भीगते हुए ऑटो रोक रही है तो हो सकता है कुछ जरूरी काम हो। इसी बीच वेद की कॉफी आ गई और वो फिर अपनी कॉफी और अपने गानों में खो गया। बारिश के तेज होने के कारण वेद काफी पीने के बाद भी वहाँ बैठा रहा और फिर एक बार उसी तरफ नज़र गई तो वो लड़की वहाँ नहीं दिखी, वेद ने सोचा च...

ज़िंदगी और मौत में ज़िंदगी को चुनने वाली कहानी

ज़िंदगी अनमोल है  आज राजीव का दिल चाह रहा था कि इस बेबस-बेचारगी से भरी जिंदगी को खत्म कर दे। कई दिनों से उसके साथ कुछ अच्छा नहीं चल रहा था। ऑफिस में बॉस कुछ दिनों से किसी न किसी बात पर राजीव के ऊपर नाराज़ हो रहे थे। राजीव जानता था कि उसका काम में ध्यान नहीं लग पा रहा है। वो हर काम में पूरा ध्यान लगाने की कोशिश करता लेकिन मानो दिमाग के अंदर बैठा कोई शैतान उसे काम करने ही नहीं देना चाहता था। ऊपर से उसकी प्रेमिका सावी के साथ रोज़ के बढ़ते झगड़ों की वजह से भी वो थोड़ा चिड़चिड़ा हो गया था। वो पहले ऐसे स्वभाव का नहीं था लेकिन पिछले साल जब उसने अपने हाथों से अपनी माँ का अंतिम संस्कार किया तब से राजीव खुद को बहुत अकेला महसूस करने लगा। अपना दुःख किसी को बता नहीं पाता, किसी के सामने आँखें गीली हो जाएँ तो "कुछ चला गया है" कहकर रूमाल के कोने से चुपके से आँखें पोंछ लेता। और इस अकेलेपन में उसे पता ही नहीं चला कि हमेशा खुश रहने वाले राजीव ने कब उसके अंदर दम तोड़ दिया और अब एक निराश, उदास और चिड़चिड़ा राजीव उसके अंदर था जो हर दिन नए संघर्ष कर रहा था। आज ऑफिस से आते समय घर से कुछ किलोमीटर दूर ही कैब से...

बरसात की रात

बरसात  की  एक  रात बारिश.....मुझे हमेशा से बारिश से थोड़ी सी नाराजगी रही है और क्यूँ न हो इसने कितनी बार मुझे जरूरी कामों के लिए देरी कराई है, कितनी बार मेरे बाहर जाने के प्लान को चौपट किया है, मेरे जीवन में इसकी अहम भूमिका रही है। मैंने सोचा नहीं था कि अचानक ये बारिश कुछ ऐसा कर देगी कि मेरी नाराज़गी एक दिन इसी में  धूल  जाएगी। बात 2 साल पहले की है जब मैं भोपाल से दिल्ली आ रही थी रात का सफर और ट्रेन में आरक्षण (reservation) न हो तो परेशानी तो होती ही है। मेरा जाना अगर जरूरी नहीं होता तो शायद कभी न जाती ऐसे; लेकिन क्या करें बॉस ने बहुत जरूरी काम के सिलसिले में  छुट्टी खत्म होने के एक हफ्ते पहले ही बुला लिया था वो भी अचानक। खैर छोड़ो मैं घर से बहुत सारी हिदायतों की गठरी साथ बाँध कर निकल ही रही थी कि अचानक मेरी बहन तान्या ने बताया कि "दीदी आपका जाना आज मुश्किल लग रहा है मौसम खराब हो रहा है, बादल गरज रहे हैं बिजली चमक रही है ऐसे में बहुत परेशानी होगी जाने में। उसकी बात सुनकर मैंने एक बार ऊपर की ओर देखा फिर अपने फ़ोन की ओर, और मुझे याद आया कि रिया तेरा आज जाना बहुत ...