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Class 10 Hindi Alankar (अलंकार)

 अलंकार  कक्षा १० हिंदी के पाठ्यक्रम में चलने वाले अलंकार हैं- अर्थालंकार- उपमा अलंकार  रूपक अलंकार उत्प्रेक्षा अलंकार अतिशयोक्ति अलंकार मानवीकरण अलंकार 1- उपमा अलंकार  इसमें एक वस्तु या व्यक्ति की तुलना किसी दूसरी वस्तु या व्यक्ति से की जाती है, ताकि उसकी विशेषता को और अधिक स्पष्ट किया जा सके। उपमा अलंकार में उपमेय (जिसकी तुलना की जा रही है) और उपमान (जिससे तुलना की जा रही है) का होना आवश्यक है। साथ ही, तुलना में उपमान वाचक शब्द जैसे ‘जैसे’, ‘समान’, ‘सा/सी’, ‘सम’, ‘प्रति’ आदि का प्रयोग होता है। उपमा अलंकार के मुख्य तत्व उपमेय – जिसकी तुलना की जा रही है। उपमान – जिससे तुलना की जा रही है। वाचक शब्द – ‘जैसे’, ‘समान’, ‘सा/सी’ आदि शब्द। धर्म – वह गुण या विशेषता जिसके कारण तुलना हो रही है। उदाहरण  १- बाल्यकाल के आदित्य जैसा उज्ज्वल चेहरा स्पष्टीकरण- आदित्य अर्थात् सूर्य। किसी के चहरे (मुख) को प्रातः काल के सूर्य के समान उज्ज्वल बताया गया है।    उपमेय  – मुख/ चेहरा  उपमान  – सूर्य  वाचक शब्द  – जैसा  धर्म  – उज्ज्वल...

समस्या का समाधान आपको पता है

  कई बार ऐसा होता है जब हमें लगता है कि हम किसी समस्या में फँस गए हैं और हमें किसी की मदद चाहिए इस समस्या से बाहर निकलने के लिए। ये दूसरों से मदद माँगने की आदत, दूसरों से सलाह लेने की आदत कई बार हमारे अंदर इतनी लग जाती है कि हमें कोई वजह की भी आवश्यकता नहीं रह जाती किसी की सलाह लेने के लिए। हम फ़ालतू में, बिना किसी कारण के दूसरों से सलाह लेने लगते हैं। कई बार हम अपने हर कार्य को करने से पहले अपने आसपास के लोगों को ऐसे देखते हैं जैसे हमें उनसे उनकी अनुमति चाहिए अपने लिए कुछ करने के लिए। कई बार हमें खुद के लिए कुछ करने के लिए, चार लोगों के बीच खुद को खुश महसूस करने में ऐसा लगने लगता है जैसे हम कुछ गलत कर रहे हैं। मज़े की बात तो ये है कि हम जिन्हें इतना, महत्त्व दे रहे होते हैं उन्हें इस बात का कोई आभास ही नहीं होता। वो इसे अपना गुण समझते हैं और अपने मूड के हिसाब से हमारे साथ बर्ताव करते हैं।   इस बात का एक बहुत ही आम सा उदाहरण ये भी है कि यदि हमें कहीं भी ऐसा कुछ पता चल जाए जैसे कि कोई इंसान है जो हमारे बारे में हमें बताएगा या कोई इंटरनेट पर वेबसाइट जो हमें हमारे बारे में बता...

आपकी ख़ुशी आपके हाथ

कहने में आसान और सुनने में थोड़ा मुश्किल और विचार करने पर समझ में न आने वाली बात लगती है कि- "आपकी ख़ुशी आपके हाथ" लेकिन ये सच है। सोचिए यदि आप एक ऐसी सभा में बैठे हैं जहाँ सभी लोग एक ऐसी भाषा में बात कर रहे हैं जो भाषा आपको समझ में नहीं आती और वास्तविकता में वे आपकी बुराई कर रहे हैं। तो क्या आप निराश हो जाएँगे? वहाँ से कहीं दूर चले जाएँगे? या खुद परेशान हो जाएँगे? नहीं। आप इनमें से कुछ भी नहीं करेंगे। क्योंकि आपको उनकी बात समझ नहीं आई जिस वजह से आपके दिल को बुरा नहीं लगा और आप परेशान नहीं हुए। ऐसे न जाने कितने उदाहरण हैं जहाँ हम खुद को बेफ़िज़ूल परेशान कर लेते हैं। ऐसे ही कई जगह पर आपकी ख़ुशी छिपी होती है किसी से किसी बात की कोई उम्मीद न करने में। मान लीजिए आपका जन्मदिन है और आपको कोई उम्मीद नहीं कि किसी को आपका जन्मदिन याद है। आप शाम को घर आते हैं और आपके घर वाले या आपके कुछ दोस्त आपको बधाई देते हैं और कुछ उपहार भी देते हैं। आपको प्रसन्नता की अनुभूति होगी। और यदि कोई आपको बधाई नहीं भी देता, कोई उपहार नहीं भी देता तो भी कम से कम आप निराश नहीं होंगे क्योंकि आपने पहले से...

तुम लड़की हो इंसान नहीं। कविता। girl's poetry।

तुम लड़की हो इंसान नहीं  आज भी कई लोगों का मानना ये है कि लड़कियों के साथ जो दुष्कर्म होते हैं उनमें लड़कियों की गलती होती है। वो ही लड़कों को हवा देती हैं। इसी पर एक व्यंग्य लिखने का प्रयास👏👏👏 तुम लड़की हो इंसान नहीं  क्यूँ इतना हँसती-मुस्कुराती हो क्यूँ जीन्स पहन कर बाहर जाती हो क्यूँ लड़कों को दोस्त बनाती हो क्यूँ खुद को उनके बराबर का जताती हो क्यूँ नहीं तुम थोड़ा शर्माती हो क्यूँ हँस-हँस बाहर चाट खाती हो क्यूँ खूबसूरत बन कर इठलाती हो क्यूँ ज्यादा समझदारी दिखाती हो क्यूँ नहीं तुम खुद को समझाती हो कि बस एक 'लड़की' हो 'औरत' हो 'नारी' हो तुम तुम 'आदमी' नहीं, तुम 'इंसान' नहीं जो उनके जैसे संसार में खुल के जीना चाहती हो ऐसी इच्छाएँ करोगी अगर वो तो मचलेंगे न तुम हवा दोगी अगर वो तो बहकेंगे न दुनिया की सलाह मान क्यूँ नहीं लेती उसे अपने जीवन में ढाल क्यूँ नहीं लेती समान जीवन पाने की मूर्खता भरी इच्छा छोड़ क्यूँ नहीं देती नहीं तो इस जीवन से मुँह मोड़ क्यूँ नहीं लेती आखिर क्यूँ???? Instagram:gunjanrajput youtube:gunjanrajput pratilipi:gunjanrajput twitter:gun...

एक लेखक का सपना । writer dream ।

एक लेखक का सपना   कुछ लिख दूँ ऐसा कि कलम को पहचान मिल जाए रचनाओं की बगिया में मेरी कविता भी खिल जाए परिवर्तन तो अटल नियम है इस पूरे संसार का ही परिवर्तन के सागर में मेरी शब्द बूँदें भी मिल जाएँ प्रेम व्यवहार में टूटते रहते हैं रोज़ कई-कई दिल किसी दिल को मेरे शब्दों से कुछ राहत मिल जाए प्रेमी को पत्र भेजने प्रेमिका बैठे जब सोच आँगन में मेरी कोई रचना भेजने को उसके दिल को भा जाए पर्व त्यौहारों को मनाने की संस्कृति रही है सदा हमारी किसी पर्व में मेरी रचना का भी एक त्यौहार मन जाए बच्चा सुनाने कविता को पलटे कविताओं के पन्ने जब मेरी किसी कविता पर फिसल उसकी उंगली थम जाए मैं गीत लिखूँ, कविताएँ लिखूँ, लिख दूँ कुछ कहानियाँ भी कवियों-लेखकों की गोष्ठी में मेरा भी थोड़ा नाम हो जाए लेखनी को शक्ति मिले, मैं लिख दूँ चुन-चुन हर विषय पर विषय खतम होने से पहले मेरी 'गूँज' खतम न हो जाए Instagram:gunjanrajput youtube:gunjanrajput pratilipi:gunjanrajput twitter:gunjanrajput  

परिस्थितियों में अवसर ढूँढने का प्रयास करें। अनुच्छेद।article।

  परिस्थिति और अवसर जब कोई समस्या हमें घेर लेती है तो चाहे-अनचाहे हमारी जीवन शैली पर उसके असर देखने को मिलते हैं। और यदि समस्या ऐसी हो जिससे सब त्रस्त हों और उसका कोई हल न मिल रहा हो तो भय के कारण जीवन जीने का और कुछ करने का हौसला टूट ही जाता है। कोविड 19 महामारी उन्हीं समस्याओं में से एक है। जिसने पूरे विश्व का जीवन जीने का ढंग तथा उसे देखने का नज़रिया ही बदल दिया। इसका बहुत बड़ा प्रभाव शिक्षा जगत पर पड़ा। इतने वर्षों से जो पढ़ने-पढ़ाने का ढंग था, विद्यालय जाकर अपने मित्रों के साथ सीखने का जो मज़ा था तथा साथ में खाना खाने का जो आनंद था वो सभी समाप्त हो गया। उस समय यदि तकनीकी सुविधाओं को शिक्षा क्षेत्र में न अपनाया होता तो विद्यार्थियों के भविष्य की तैयारी में एक बड़ी रुकावट आ जाती। विषम परिस्थिति में पढ़ने-पढ़ाने के, सीखने-सिखाने के नए तरीक़ों से परिचय हुआ। ऑनलाइन माध्यम को अपनाकर विद्यार्थी घर बैठे अपने शिक्षकों से पढ़ सके और अभिभावकों की नज़रोंमें रहकर बहुत कुछ सीख सके। इस परिस्थिति में हमें पढ़ने-पढ़ाने, घर से काम करने के साथ ही और भी बहुत कुछ सीखने के अवसर मिले जैसे-...

धैर्य-दृढ़ता-कविता

तू धैर्य रख, तू धैर्य रख   मुश्किलें   हैं   परेशनियाँ   भी   तूफ़ान   हैं  तो  होंगी   आँधियाँ   भी     लेकिन   तू   ये   याद   रख     तू   धैर्य   रख ,  तू   धैर्य   रख       सफ़र   है   तो   कहीं   धूप   होगी   कभी   प्यास   कभी   भूख   होगी     तू   हिम्मत   के   साथ   ये   याद   रख     तू   धैर्य   रख ,  तू   धैर्य   रख       मार्ग   कठिन   है ,  पत्थर   पड़े   हैं   कहीं   काँटे   कहीं   गड्डे   गड़े   हैं   तू   ध्यानपूर्वक   पैर   रख     तू   धैर्य   रख ,  तू   धैर्य   रख  

ज़िंदगी और मौत में ज़िंदगी को चुनने वाली कहानी

ज़िंदगी अनमोल है  आज राजीव का दिल चाह रहा था कि इस बेबस-बेचारगी से भरी जिंदगी को खत्म कर दे। कई दिनों से उसके साथ कुछ अच्छा नहीं चल रहा था। ऑफिस में बॉस कुछ दिनों से किसी न किसी बात पर राजीव के ऊपर नाराज़ हो रहे थे। राजीव जानता था कि उसका काम में ध्यान नहीं लग पा रहा है। वो हर काम में पूरा ध्यान लगाने की कोशिश करता लेकिन मानो दिमाग के अंदर बैठा कोई शैतान उसे काम करने ही नहीं देना चाहता था। ऊपर से उसकी प्रेमिका सावी के साथ रोज़ के बढ़ते झगड़ों की वजह से भी वो थोड़ा चिड़चिड़ा हो गया था। वो पहले ऐसे स्वभाव का नहीं था लेकिन पिछले साल जब उसने अपने हाथों से अपनी माँ का अंतिम संस्कार किया तब से राजीव खुद को बहुत अकेला महसूस करने लगा। अपना दुःख किसी को बता नहीं पाता, किसी के सामने आँखें गीली हो जाएँ तो "कुछ चला गया है" कहकर रूमाल के कोने से चुपके से आँखें पोंछ लेता। और इस अकेलेपन में उसे पता ही नहीं चला कि हमेशा खुश रहने वाले राजीव ने कब उसके अंदर दम तोड़ दिया और अब एक निराश, उदास और चिड़चिड़ा राजीव उसके अंदर था जो हर दिन नए संघर्ष कर रहा था। आज ऑफिस से आते समय घर से कुछ किलोमीटर दूर ही कैब से...