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Hindi Speech for Republic Day (गणतंत्र दिवस पर भाषण)

  गणतंत्र दिवस पर ओजस्वी भाषण सभी को इस गौरवशाली गणतंत्र दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएँ।  आदरणीय प्रधानाचार्या जी, इस अंधकारमय जीवन में ज्ञान ज्योति देने वाले मेरे सभी गुरूवृंद तथा मेरे सभी साथियों।  आज का यह दिन हम सभी भारतीयों के लिए गर्व और सम्मान का प्रतीक है। हम सब यहाँ 26 जनवरी का जश्न मनाने के लिए एकत्र हुए हैं, जो हमारे देश के इतिहास में एक गौरवशाली दिन है। इस दिन हमारा देश एक गणराज्य बना और हमारा संविधान लागू हुआ और भारत के वीरों ने दृढ़ संकल्प के साथ एक नया इतिहास रच डाला। उनके सम्मान में कुछ पंक्तियाँ कहना चाहूँगी- "चलो झुक कर सलाम करें उन्हें, जिनके हिस्से में ये मुकाम आया है। खुशनसीब होता है वो खून, जो देश के काम आया है।" गणतंत्र दिवस का मतलब केवल तिरंगा फहराना और राष्ट्रगान गाना नहीं है, बल्कि इसका मतलब है कि हम अपने देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें और उसे निभाएँ। 26 जनवरी 1950 को हमारा संविधान लागू हुआ, जिसने हमें स्वतंत्रता, समानता और न्याय का अधिकार दिया। यह संविधान न केवल हमारे अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि हमारे कर्तव्यों की भी याद दिलाता है। गणत...

हम सभी किताबें हैं

हम सभी हैं किताबें किताबें, ढेरों पन्नों को खुद में संजोए हुए कुछ खुले पन्ने तो कुछ के बीज मन में बोए हुए हम हैं किताबें मगर पाठक भी हैं हममें हैं ढेरों किस्से, भिन्न लिखावट भी है कुछ पन्नों पर गहरी स्याही से लिखे हैं हमारे गम, हमारे डर, हमारी खामोशी की वजह कुछ पर स्याही उड़ने लगी है लेकर हमारी मुस्कुराहट और सुहानी सुबह कुछ खाली पन्ने लिए हम सभी इंतज़ार में हैं हमें पढ़कर समझ सके कोई उसके इश्तेहार में हैं कोई लेकर अपनी स्याही में खुशियों के रंग बिखेर दे कुछ पन्नों पर अपने पन्नों के संग हम सभी हैं किताबें हमें खुद को पढ़ना है, हर पन्ने पर अपनी मर्ज़ी का हर्फ़ लिखना है हम सभी हैं किताबें ये याद रखना है

save soil hindi song

देखो तो क्यूँ हो गई  ये सूखी-सूखी माटी   ये रेत हुई माटी क्यूँ....... इससे तो है जीवन  ये सम्पदा पुरानी  सुधारें ये कहानी हम........ अफ़सोस होगा एक दिन  तब कहाँ थे हम  दूषित हो रही थी  तब कहाँ थे हम  बिगड़ रही थी जब कहानी  बात तुमने तब क्यूँ न मानी  देखो तो क्यूँ हो गई  ये सूखी-सूखी माटी  ये रेत हुई माटी क्यूँ....... इससे तो है जीवन  ये सम्पदा पुरानी  सुधारें ये कहानी हम........ अफ़सोस होगा एक दिन  तब कहाँ थे हम  दूषित हो रही थी  तब कहाँ थे हम बिगड़ रही थी जब कहानी  हमें बचानी है अब ये निशानी  बरसों से ये हो रही मायूस माटी   ये रेतीली माटी     क्यूँ....... इससे तो है जीवन  ये सम्पदा पुरानी  सुधारें ये कहानी हम........ अफ़सोस होगा एक दिन  तब कहाँ थे हम  दूषित हो रही थी  तब कहाँ थे हम बिगड़ रही थी जब कहानी  हमें बचानी है अब ये निशानी  चलो बदल दें अब ये कहानी  ये रोक लें निशानी        हम...... इससे तो है जीव...

गणतंत्र दिवस कविता

देश के प्रत्येक नागरिक को गणतंत्र दिवस की बधाई। गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में मैं प्रस्तुत कर रही हूँ एक कविता-  जल रही थी चिंगारी जाने कितने बरसों से  कर रहे थे यत्न वीर जाने कितने अरसों से  आँखें क्रुद्ध, भीषण युद्ध, ब्रिटिश विरुद्ध जाने कितनी बार हुए.... माताओं की गोदी सूनी कर  जाने कितने बेटे संहार हुए  वीरों के बलिदानों से माँ भारती  बेड़ियाँ मुक्त हुई  फिर केसरिया-सफ़ेद-हरा लहरा  माँ भारती तिरंगा युक्त हुई  स्वतंत्र हुई, स्वराज्य मिला किंतु  स्वशासन अभी अधूरा था  जिसे 2 वर्ष, 11 माह 18 दिन में  अम्बेडकर जी ने किया पूरा था  फिर संविधान लागू कर लोकतंत्र का 'गुंजन' हुआ  आज इसी दिन गणराज्य बना आज ही गणतंत्र हुआ आज इसी दिन गणराज्य बना आज ही गणतंत्र हुआ    सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ तथा सभी वीरों/ शहीदों को श्रद्धांजलि अन्य कविताएँ IG- poetry_by_heartt twitter