देखो तो क्यूँ हो गई
ये सूखी-सूखी माटी
ये रेत हुई माटी
क्यूँ.......
इससे तो है जीवन
ये सम्पदा पुरानी
सुधारें ये कहानी
हम........
अफ़सोस होगा एक दिन
तब कहाँ थे हम
दूषित हो रही थी
तब कहाँ थे हम
बिगड़ रही थी जब कहानी
बात तुमने तब क्यूँ न मानी
देखो तो क्यूँ हो गई
ये सूखी-सूखी माटी
ये रेत हुई माटी
क्यूँ.......
इससे तो है जीवन
ये सम्पदा पुरानी
सुधारें ये कहानी
हम........
अफ़सोस होगा एक दिन
तब कहाँ थे हम
दूषित हो रही थी
तब कहाँ थे हम
बिगड़ रही थी जब कहानी
हमें बचानी है अब ये निशानी
बरसों से ये हो रही मायूस माटी
ये रेतीली माटी क्यूँ.......
इससे तो है जीवन
ये सम्पदा पुरानी
सुधारें ये कहानी
हम........
अफ़सोस होगा एक दिन
तब कहाँ थे हम
दूषित हो रही थी
तब कहाँ थे हम
बिगड़ रही थी जब कहानी
हमें बचानी है अब ये निशानी
चलो बदल दें अब ये कहानी
ये रोक लें निशानी हम......
इससे तो है जीवन
ये सम्पदा पुरानी
सुधारें ये कहानी
हम........
अफ़सोस होगा एक दिन
तब कहाँ थे हम
दूषित हो रही थी
तब कहाँ थे हम
बिगड़ रही थी जब कहानी
हमें बचानी है अब ये निशानी
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आपका बहुत-बहुत धन्यवाद....🙏🏻🙏🏻🙏🏻