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सड़कें (The Road) हिंदी

सड़कें   सड़कें चित्र उकेरती हैं  सजीव चित्र, विभिन्न चित्र  कहीं किसी कोने में  काले रंग से अंधकार दिखाकर  वहाँ छोटे-छोटे चूल्हे जलाकर  दिखते हैं कुछ मजबूर लोग  कुछ मजबूर लोग, कुछ मज़दूर लोग  कुछ बेपरवाह सड़कों पर खुली  साँस लेते जीवन से भरे हुए  खिले हुए लोग  तो कहीं किसी कोने में  बुरी आदतों का मारा  शीशी-बोतलों से हारा  कहीं सब कुछ लुटा चुका  कहीं सब कुछ लुटाने वाला  दिखता है एक डगमगाता आदमी  खाक छानता हुआ  खुद को बादशाह मानता हुआ  कहीं दिखती हैं कुछ बेचारी माँएँ  अपने नन्हे शिशुओं को गले से लगाए हुए  छोटी सी खुशी पर दिल से मुस्कुराए हुए  कड़कड़ाती सर्दी में सीने की गर्मी से बच्चे को सुलाए हुए  अपनी थाली का खाना उसकी भूख के लिए बचाए हुए  काली अंधेरी रात में आँखों में जीवन ज्योति जलाए हुए  वहीं कहीं दिखती हैं  पूरी सड़क घेरे चमचमाती  शोर मचाती  दो-चार-आठ पहिए की गाड़ियाँ ............. उस ठहरी सी सड़क पर भागती हुई सी  उस सोती सी रात में खुद ज...

Aaj ki Durga (आज की दुर्गा)

आज की दुर्गा  'आज की दुर्गा' पर एक speech.... आदरणीय प्रधानाचार्य/प्रधानाचार्या जी, सभी शिक्षक गण तथा मित्रों।  आज मैं आपके सामने 'आज की दुर्गा' के विषय पर अपने कुछ विचार रख रही हूँ।  दुर्गा का नाम सुनते ही हमारी आँखों के सामने शक्ति और साहस की देवी का चित्र आता है। परंपरागत रूप से, माँ दुर्गा को दुष्टों का नाश करने वाली और सत्य की रक्षा करने वाली माना जाता है। उनके दस हाथ हमें यह सिखाते हैं कि जीवन में कई जिम्मेदारियाँ  होती हैं, और हमें हर चुनौती का डटकर सामना करना चाहिए। लेकिन माँ दुर्गा का रूप केवल पूजा की मूर्तियों तक सीमित नहीं है। आज की दुर्गा हर उस महिला में है जो अपने जीवन में अपने अधिकार और अपने सपने के लिए लड़ती है। चाहे वह घर की जिम्मेदारी निभाने वाली गृहिणी हो, या ऑफिस में मेहनत करने वाली कोई महिला। डॉक्टर, टीचर, पुलिस, वकील, वैज्ञानिक—हर जगह आज की दुर्गा अपना काम कर रही हैं। इस दुर्गा के भी दस हाथ हैं। किसी हाथ से उसने घर की ज़िम्मेदारियों को सँभाल रखा है तो एक हाथ से वो अपने सपने के लिए मेहनत कर रही है। अपने किसी हाथ से बच्चों की परवरिश में लगी है तो ...

शिक्षक का सम्मान क्यों ज़रूरी

मैं संस्कृत और हिंदी की शिक्षिका के रूप में ज़्यादा नहीं लेकिन लगभग 8 वर्ष से कार्य कर रही हूँ। इतने दिनों में कई बच्चों से मिलना हुआ, कई अभिभावकों से मिलना हुआ और बहुत सारे शिक्षक-शिक्षिकाओं से मिलना हुआ। इतने दिनों में मैंने एक सवाल का काफ़ी बार सामना किया है और वो सवाल है- "आप शिक्षक by choice हैं या by chance"? मैंने हमेशा से इस सवाल के उत्तर में यही कहा है कि मैं by choice शिक्षक हूँ। और मुझे उन लोगों से भी शिकायत नहीं है जो by chance शिक्षक बन गए हैं। शिकायत तो उन लोगों से और उनकी मानसिकता से है जो आज भी ये सोचते हैं कि- अगर कुछ न कर सके तो शिक्षक बन जाएँगे। जो आज भी ये सोचते हैं कि सभी नौकरियों में सबसे अधिक सरल teacher बनना है तो ये उनकी गलत मानसिकता है। बहुत से लोग सोचते हैं कि- teacher की job सबसे कम समय की job होती है जबकि ऐसा नहीं है। लगभग सभी नौकरियों में एक teacher की job ऐसी job है जिसमें सबसे अधिक unpaid hours काम करना पड़ता है। इसके साथ ही teachers वो होते हैं जो सिर्फ शिक्षा ही नहीं देते बल्कि आने वाले समाज का निर्माण करते हैं। और इस नए समाज को बनाने वाले...

दिल चाहता है

Good Night thought बहुत से लोग बहुत सी बातों को दिल ही दिल में दबा कर रखते हैं। उन्हें पता है कि उन्हें क्या करना है, क्या खाना है, कहाँ जाना है, किसके साथ आगे रिश्ते बनाए रखने हैं और किसके साथ उनके रिश्ते अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। उन्हें सब पता होता है और उनका दिल चाहता है कि वो किसी की भी परवाह किए बग़ैर सिर्फ अपने दिल की सुनें और आगे बढ़ें लेकिन पता नहीं कौन सी ऐसी चीज़ होती है जो उन्हें रोक लेती है और उनके दिल के न चाहने पर भी उन्हें वो काम करने के लिए धकेलती रहती है। ये सब कुछ दिन या कुछ महीनों की बातें हैं आख़िर में हमें दिल को ही खुश रखना है क्यूँकि दिल जहाँ खुश वहाँ हम खुश। तो फिर सब जगह से हारने के बाद, दिल को तुड़वाने के बाद ही सबक़ लेना ज़रूरी है क्या? नहीं। बिलकुल भी नहीं। दिल जो चाहता है वो सही है। उसे करो। आगे बढ़ो। अगर आपके दिल को खुश करने में, उसकी मानने में किसी के साथ कुछ गलत नहीं होता तो क्या परेशानी है दिल कि सुनने में? इसी बात पर एक लाइन लिखने का मन कर रहा है कि- तू ख़ुद को खुश रख 'बंदे', दिल को दर्द देने को दुनिया काफ़ी है ग़ैरों की ख़ातिर ख़ुद...

भ्रष्ट कुर्सियाँ-भ्रष्टाचार-कविता

बरसों की छिपी ख्वाइशें मानो, एक साथ निकलती हैं  स्वयं की मुस्कुराहटों में,  न जाने  कितनी आँखें विकलती हैं  एक ग़ुरूर, एक नशा घिरता है चारों ओर  फिर कुर्सियाँ कहाँ सँभलती हैं  - खुद ऊँचे, बाक़ी नीचे  अचानक नज़र आने लगते हैं  अपना रुतबा, अपना ज़ोर  आज़माने लगते हैं  दूसरों का हक़ लेने को- उँगलियाँ मचलती हैं  फिर कुर्सियाँ कहाँ सँभलती हैं  कोई अपना हक़ माँग ले तो  नज़रों में हीनता दिखाई जाती है  मानव की नज़रों में मानवता  गिराई जाती है छल-कपटता आँखों में चमकती है फिर कुर्सियाँ कहाँ सँभलती हैं @गुंजन राजपूत

धैर्य-दृढ़ता-कविता

तू धैर्य रख, तू धैर्य रख   मुश्किलें   हैं   परेशनियाँ   भी   तूफ़ान   हैं  तो  होंगी   आँधियाँ   भी     लेकिन   तू   ये   याद   रख     तू   धैर्य   रख ,  तू   धैर्य   रख       सफ़र   है   तो   कहीं   धूप   होगी   कभी   प्यास   कभी   भूख   होगी     तू   हिम्मत   के   साथ   ये   याद   रख     तू   धैर्य   रख ,  तू   धैर्य   रख       मार्ग   कठिन   है ,  पत्थर   पड़े   हैं   कहीं   काँटे   कहीं   गड्डे   गड़े   हैं   तू   ध्यानपूर्वक   पैर   रख     तू   धैर्य   रख ,  तू   धैर्य   रख  

गणतंत्र दिवस कविता

देश के प्रत्येक नागरिक को गणतंत्र दिवस की बधाई। गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में मैं प्रस्तुत कर रही हूँ एक कविता-  जल रही थी चिंगारी जाने कितने बरसों से  कर रहे थे यत्न वीर जाने कितने अरसों से  आँखें क्रुद्ध, भीषण युद्ध, ब्रिटिश विरुद्ध जाने कितनी बार हुए.... माताओं की गोदी सूनी कर  जाने कितने बेटे संहार हुए  वीरों के बलिदानों से माँ भारती  बेड़ियाँ मुक्त हुई  फिर केसरिया-सफ़ेद-हरा लहरा  माँ भारती तिरंगा युक्त हुई  स्वतंत्र हुई, स्वराज्य मिला किंतु  स्वशासन अभी अधूरा था  जिसे 2 वर्ष, 11 माह 18 दिन में  अम्बेडकर जी ने किया पूरा था  फिर संविधान लागू कर लोकतंत्र का 'गुंजन' हुआ  आज इसी दिन गणराज्य बना आज ही गणतंत्र हुआ आज इसी दिन गणराज्य बना आज ही गणतंत्र हुआ    सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ तथा सभी वीरों/ शहीदों को श्रद्धांजलि अन्य कविताएँ IG- poetry_by_heartt twitter

एक सलाम आर्मी के नाम

  एक सलाम आर्मी के नाम  कितनी हिम्मत, कितना जज़्बा  कितना हौंसला दिल में होता होगा  जो खुद को स्वयं ख़तरे के  सामने खड़ा करता होगा...  कितनी मोहब्बत, कितनी परवाह,  कितना प्यार दिल में उसके भरा होता होगा  जो करोड़ों को बचाने की खातिर  स्वयं रास्ते में खड़ा होता होगा... कितनी कुर्बानी, कितनी परेशानी  कितनी बमबारी वो झेलता होगा  जो मुश्किलों का सामना करने  तैनात सीमा पर होता होगा... माँ उसकी राह तकती, पत्नी इंतज़ार में रहती, बच्चा उसके बिन ही बड़ा होता है एक सलाम उसके लिए जो अपना  सब छोड़ सरहद पर खड़ा होता है एक सलाम आर्मी के नाम    IG-poetry_by_heartt my website gunjan writes twitter linkedin