Good Night thought
बहुत से लोग बहुत सी बातों को दिल ही दिल में दबा कर रखते हैं। उन्हें पता है कि उन्हें क्या करना है, क्या खाना है, कहाँ जाना है, किसके साथ आगे रिश्ते बनाए रखने हैं और किसके साथ उनके रिश्ते अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। उन्हें सब पता होता है और उनका दिल चाहता है कि वो किसी की भी परवाह किए बग़ैर सिर्फ अपने दिल की सुनें और आगे बढ़ें लेकिन पता नहीं कौन सी ऐसी चीज़ होती है जो उन्हें रोक लेती है और उनके दिल के न चाहने पर भी उन्हें वो काम करने के लिए धकेलती रहती है। ये सब कुछ दिन या कुछ महीनों की बातें हैं आख़िर में हमें दिल को ही खुश रखना है क्यूँकि दिल जहाँ खुश वहाँ हम खुश। तो फिर सब जगह से हारने के बाद, दिल को तुड़वाने के बाद ही सबक़ लेना ज़रूरी है क्या? नहीं। बिलकुल भी नहीं। दिल जो चाहता है वो सही है। उसे करो। आगे बढ़ो। अगर आपके दिल को खुश करने में, उसकी मानने में किसी के साथ कुछ गलत नहीं होता तो क्या परेशानी है दिल कि सुनने में? इसी बात पर एक लाइन लिखने का मन कर रहा है कि-
तू ख़ुद को खुश रख 'बंदे', दिल को दर्द देने को दुनिया काफ़ी है
ग़ैरों की ख़ातिर ख़ुद को दुःख देने में कहाँ की इंसाफ़ी है
तू ख़ुद को खुश रख 'बंदे', दिल को दर्द देने को दुनिया काफ़ी है
मेरा एक छोटा सा संदेश है- अगर आपके खुश रहने में, दिल की सुनने में किसी को वाक़ई कोई हानि नहीं पहुँच रही है और फिर भी आप खुश नहीं है तो फिर आपकी बहुत बड़ी गलती है। खुश रहिए, दिल की सुनिए दिल से पूछिए आख़िर वो क्या चाहता है।
बहुत से लोग बहुत सी बातों को दिल ही दिल में दबा कर रखते हैं। उन्हें पता है कि उन्हें क्या करना है, क्या खाना है, कहाँ जाना है, किसके साथ आगे रिश्ते बनाए रखने हैं और किसके साथ उनके रिश्ते अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। उन्हें सब पता होता है और उनका दिल चाहता है कि वो किसी की भी परवाह किए बग़ैर सिर्फ अपने दिल की सुनें और आगे बढ़ें लेकिन पता नहीं कौन सी ऐसी चीज़ होती है जो उन्हें रोक लेती है और उनके दिल के न चाहने पर भी उन्हें वो काम करने के लिए धकेलती रहती है। ये सब कुछ दिन या कुछ महीनों की बातें हैं आख़िर में हमें दिल को ही खुश रखना है क्यूँकि दिल जहाँ खुश वहाँ हम खुश। तो फिर सब जगह से हारने के बाद, दिल को तुड़वाने के बाद ही सबक़ लेना ज़रूरी है क्या? नहीं। बिलकुल भी नहीं। दिल जो चाहता है वो सही है। उसे करो। आगे बढ़ो। अगर आपके दिल को खुश करने में, उसकी मानने में किसी के साथ कुछ गलत नहीं होता तो क्या परेशानी है दिल कि सुनने में? इसी बात पर एक लाइन लिखने का मन कर रहा है कि-
तू ख़ुद को खुश रख 'बंदे', दिल को दर्द देने को दुनिया काफ़ी है
ग़ैरों की ख़ातिर ख़ुद को दुःख देने में कहाँ की इंसाफ़ी है
तू ख़ुद को खुश रख 'बंदे', दिल को दर्द देने को दुनिया काफ़ी है
मेरा एक छोटा सा संदेश है- अगर आपके खुश रहने में, दिल की सुनने में किसी को वाक़ई कोई हानि नहीं पहुँच रही है और फिर भी आप खुश नहीं है तो फिर आपकी बहुत बड़ी गलती है। खुश रहिए, दिल की सुनिए दिल से पूछिए आख़िर वो क्या चाहता है।
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आपका बहुत-बहुत धन्यवाद....🙏🏻🙏🏻🙏🏻