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सड़कें (The Road) हिंदी

सड़कें   सड़कें चित्र उकेरती हैं  सजीव चित्र, विभिन्न चित्र  कहीं किसी कोने में  काले रंग से अंधकार दिखाकर  वहाँ छोटे-छोटे चूल्हे जलाकर  दिखते हैं कुछ मजबूर लोग  कुछ मजबूर लोग, कुछ मज़दूर लोग  कुछ बेपरवाह सड़कों पर खुली  साँस लेते जीवन से भरे हुए  खिले हुए लोग  तो कहीं किसी कोने में  बुरी आदतों का मारा  शीशी-बोतलों से हारा  कहीं सब कुछ लुटा चुका  कहीं सब कुछ लुटाने वाला  दिखता है एक डगमगाता आदमी  खाक छानता हुआ  खुद को बादशाह मानता हुआ  कहीं दिखती हैं कुछ बेचारी माँएँ  अपने नन्हे शिशुओं को गले से लगाए हुए  छोटी सी खुशी पर दिल से मुस्कुराए हुए  कड़कड़ाती सर्दी में सीने की गर्मी से बच्चे को सुलाए हुए  अपनी थाली का खाना उसकी भूख के लिए बचाए हुए  काली अंधेरी रात में आँखों में जीवन ज्योति जलाए हुए  वहीं कहीं दिखती हैं  पूरी सड़क घेरे चमचमाती  शोर मचाती  दो-चार-आठ पहिए की गाड़ियाँ ............. उस ठहरी सी सड़क पर भागती हुई सी  उस सोती सी रात में खुद ज...

आपका चुप रहना

आपका चुप रहना आपकी कमजोरी नहीं आपकी ताक़त हो तो अच्छा है। कई कारण ऐसे हो जाते हैं जब आप बहुत कुछ बोलना चाहते हैं लेकिन किसी मजबूरी के कारण आप बोल नहीं पाते उस समय जो घुटन महसूस होती है उसे सिर्फ वही जान सकता है जो इसे महसूस कर सकता है। कई बार ऐसा भी होता है कि बोलने का बहुत कुछ होता है आपके पास लेकिन आपको पता है कि आपकी बात का वहाँ कोई महत्त्व नहीं है अथवा वहाँ आपकी बात बोलने से बात खराब हो सकती है अथवा वहाँ जो स्वयं को बुद्धिमान समझने वाले लोग बैठे हैं वहाँ आपकी बात का कोई स्थान नहीं ऐसा सोचकर आप जब स्वयं की मर्ज़ी से शांत होते हैं। तब वो आपकी मजबूरी नहीं आपकी ताक़त होती है। आपके चुप रहने को लोग आपकी कमजोरी समझ सकते हैं। लेकिन ये पूरी तरह से आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप उसे अपनी कमजोरी बना रहे हैं अथवा ताक़त। शब्द बहुत ज़रूरी होते हैं। यहाँ चुप रहने पर या बोलने पर किसी भी बात पर कोई pressure नहीं है। शब्दों के माध्यम से ही तो आप अपनी बात दूसरों तक पहुँचाते हैं लेकिन समस्या तब है जब आपका आपके शब्दों पर पूरी तरह से नियंत्रण हो। यदि सही शब्द बोलने में समस्या है तो बुरे शब्द बोलने से पहल...

भाव

भाव  भावों की उर गगरी में नित नए भाव आते हैं कुछ ले जाते हैं बरसों पीछे कुछ भावी सपने सजाते हैं कुछ होते हैं हँसते हुए-से अधरों पे मुस्कान बिठाते हैं कुछ होते हैं युक्त वेदना-से नयन गीले कर जाते हैं कुछ होते हैं महफिलों में बसते एक साथ हाथ बढ़ाते हैं कुछ तन्हाइयों में पड़े मायूस-से होते अहसास अकेलेपन का कराते हैं कुछ होते हैं खिले-खिले से जीवन को नई दिशा दिखाते हैं कुछ होते हैं वही परिचित-से अतीत में रहना सिखाते हैं कुछ होते हैं समझदार-से सत्य का भान कराते हैं लाते हैं जीवन जीने की इच्छा मंजिल को कदम बढ़ाते हैं

नई राह नई उम्मीद

  नई राह बीच राह में बैठा पंथी, सोचा करता है एक बात। मेहनत कर आगे बढ़ना है, चाहे दिन हो चाहे रात।। सुबह सवेरे सूरज आता, हमको यही सिखाता है। चाहे जितना हो अंधेरा, आखिर छट ही जाता है।। अच्छा बुरा जैसा भी हो, समय की सूई चलती है। जहाँ बंद होती एक राह, दूजी राह निकलती है।। थक कर जब भी रुकता है, लेने को थोड़ा आराम। कोशिशों पर लग जाता है, छोटा सा एक अल्प विराम।। उठकर फिर से चलता है, करने को वो अपने काम। एक-एक कर नई ठोकरें करता रहता अपने नाम।। तभी हार कर नदी देखता, जो हमको यही सिखाती है। जहाँ बंद होती एक राह, दूजी राह मिल जाती है।। दीवार पर चलती चींटी, कितनी बार फिसलती है। हर बार वो गिरती रहती फिर भी नित वो चलती है। दृढ़ निश्चय कर आगे बढ़ना, उसका है यही स्वभाव। हार कर भी हार न माने, दिल में रहता जीत का भाव।। लगातार प्रयासों से वो, जीत अपने नाम लिखवाती है। जहाँ बंद होती एक राह दूजी राह मिल जाती है।।

तुम लड़की हो इंसान नहीं। कविता। girl's poetry।

तुम लड़की हो इंसान नहीं  आज भी कई लोगों का मानना ये है कि लड़कियों के साथ जो दुष्कर्म होते हैं उनमें लड़कियों की गलती होती है। वो ही लड़कों को हवा देती हैं। इसी पर एक व्यंग्य लिखने का प्रयास👏👏👏 तुम लड़की हो इंसान नहीं  क्यूँ इतना हँसती-मुस्कुराती हो क्यूँ जीन्स पहन कर बाहर जाती हो क्यूँ लड़कों को दोस्त बनाती हो क्यूँ खुद को उनके बराबर का जताती हो क्यूँ नहीं तुम थोड़ा शर्माती हो क्यूँ हँस-हँस बाहर चाट खाती हो क्यूँ खूबसूरत बन कर इठलाती हो क्यूँ ज्यादा समझदारी दिखाती हो क्यूँ नहीं तुम खुद को समझाती हो कि बस एक 'लड़की' हो 'औरत' हो 'नारी' हो तुम तुम 'आदमी' नहीं, तुम 'इंसान' नहीं जो उनके जैसे संसार में खुल के जीना चाहती हो ऐसी इच्छाएँ करोगी अगर वो तो मचलेंगे न तुम हवा दोगी अगर वो तो बहकेंगे न दुनिया की सलाह मान क्यूँ नहीं लेती उसे अपने जीवन में ढाल क्यूँ नहीं लेती समान जीवन पाने की मूर्खता भरी इच्छा छोड़ क्यूँ नहीं देती नहीं तो इस जीवन से मुँह मोड़ क्यूँ नहीं लेती आखिर क्यूँ???? Instagram:gunjanrajput youtube:gunjanrajput pratilipi:gunjanrajput twitter:gun...

एक लेखक का सपना । writer dream ।

एक लेखक का सपना   कुछ लिख दूँ ऐसा कि कलम को पहचान मिल जाए रचनाओं की बगिया में मेरी कविता भी खिल जाए परिवर्तन तो अटल नियम है इस पूरे संसार का ही परिवर्तन के सागर में मेरी शब्द बूँदें भी मिल जाएँ प्रेम व्यवहार में टूटते रहते हैं रोज़ कई-कई दिल किसी दिल को मेरे शब्दों से कुछ राहत मिल जाए प्रेमी को पत्र भेजने प्रेमिका बैठे जब सोच आँगन में मेरी कोई रचना भेजने को उसके दिल को भा जाए पर्व त्यौहारों को मनाने की संस्कृति रही है सदा हमारी किसी पर्व में मेरी रचना का भी एक त्यौहार मन जाए बच्चा सुनाने कविता को पलटे कविताओं के पन्ने जब मेरी किसी कविता पर फिसल उसकी उंगली थम जाए मैं गीत लिखूँ, कविताएँ लिखूँ, लिख दूँ कुछ कहानियाँ भी कवियों-लेखकों की गोष्ठी में मेरा भी थोड़ा नाम हो जाए लेखनी को शक्ति मिले, मैं लिख दूँ चुन-चुन हर विषय पर विषय खतम होने से पहले मेरी 'गूँज' खतम न हो जाए Instagram:gunjanrajput youtube:gunjanrajput pratilipi:gunjanrajput twitter:gunjanrajput  

कैसी शिक्षा हमने पाई है। स्वार्थ कविता।

स्वार्थ  रह - रह  के  उठ  रहा है  मन   मस्तिष्क  में  प्रश्न  मेरे ये कैसी शिक्षा हमने  पाई  है कभी  उजाड़   दिए  खुद ही के  लिए   जंगल - वन तो कभी प्रकृति में  आग   लगाई  है कामयाबी की बुलंदी इतनी कि चाँद   और   मंगल  की  कम   पड़   गई   ऊँचाई  है रह - रह  के  उठ  रहा है  मन   मस्तिष्क  में  प्रश्न  मेरे ये कैसी शिक्षा हमने  पाई  है सागर   सुखाए ,  पर्वत  छाँटे वृक्षों की करी  कटाई  है ये कैसी शिक्षा है जिससे जीवों की  जान  पे  बन   आई  है अब  हो  गए  हैं  कैद  खुद ही के  बनाए  पिंजरों में पर  ये भी  शायद   कम  रहा क्योंकि  अकल  अभी न  आई  है रह - रह  के  उठ  रहा है  मन   मस्तिष्क  में  प्रश्न  मेरे ये कैसी शिक्षा हमने  पाई  है दीवाली...

मज़दूर दिवस पर कविता। labor day poem

 मज़दूर  हैं कुछ लोग जो पढ़ नहीं पाते हैं शिक्षा से वंचित से रह जाते हैं और हम उनके शुभचिंतक... जिनसे वे धिक्कार सा पाते हैं हाँ सही है....पढ़ना सबको चाहिए फिर ये कैसे पढ़ने से बच जाते हैं और फिर हमारे लिए कभी घर बनाते हैं कभी वातावरण स्वच्छ करने में योगदान दे जाते हैं हमारे द्वारा वे कुछ खास आदर नहीं पाते हैं पर फिर भी जीवन भर हमारे काम आते हैं गलतफहमी है कि आलीशान मकान हम बनाते हैं पूछे कोई उनसे किस कदर खून पसीना उसमें वो बहाते हैं सच कहें तो स्वच्छता के नाम पर भी हम बस नाम ही कर पाते हैं कोई देखे उन्हें कैसे खुद की फिकर छोड़ वे गंदी नालियों में कूद जाते हैं हम कहते हैं स्वच्छता में ईश्वर निवास करता है उस   निवास  के  लिए  क्या  हम  उनका  ऋण  चुकाते हैं??? हैं कुछ लोग जो पढ़ नहीं पाते हैं समाज में मजदूर कहलाते हैं देखे कोई मजदूरी उनकी... बहुत कम में हमें बहुत कुछ दे जाते हैं हैं  कुछ   लोग  जो  पढ़  नहीं पाते हैं Gunjan Rajput Instagram:gunjanrajput youtube:gunjanrajput pratilipi:gunjanrajput twitter:gunjanrajput

भ्रष्ट कुर्सियाँ-भ्रष्टाचार-कविता

बरसों की छिपी ख्वाइशें मानो, एक साथ निकलती हैं  स्वयं की मुस्कुराहटों में,  न जाने  कितनी आँखें विकलती हैं  एक ग़ुरूर, एक नशा घिरता है चारों ओर  फिर कुर्सियाँ कहाँ सँभलती हैं  - खुद ऊँचे, बाक़ी नीचे  अचानक नज़र आने लगते हैं  अपना रुतबा, अपना ज़ोर  आज़माने लगते हैं  दूसरों का हक़ लेने को- उँगलियाँ मचलती हैं  फिर कुर्सियाँ कहाँ सँभलती हैं  कोई अपना हक़ माँग ले तो  नज़रों में हीनता दिखाई जाती है  मानव की नज़रों में मानवता  गिराई जाती है छल-कपटता आँखों में चमकती है फिर कुर्सियाँ कहाँ सँभलती हैं @गुंजन राजपूत

परिस्थितियों में अवसर ढूँढने का प्रयास करें। अनुच्छेद।article।

  परिस्थिति और अवसर जब कोई समस्या हमें घेर लेती है तो चाहे-अनचाहे हमारी जीवन शैली पर उसके असर देखने को मिलते हैं। और यदि समस्या ऐसी हो जिससे सब त्रस्त हों और उसका कोई हल न मिल रहा हो तो भय के कारण जीवन जीने का और कुछ करने का हौसला टूट ही जाता है। कोविड 19 महामारी उन्हीं समस्याओं में से एक है। जिसने पूरे विश्व का जीवन जीने का ढंग तथा उसे देखने का नज़रिया ही बदल दिया। इसका बहुत बड़ा प्रभाव शिक्षा जगत पर पड़ा। इतने वर्षों से जो पढ़ने-पढ़ाने का ढंग था, विद्यालय जाकर अपने मित्रों के साथ सीखने का जो मज़ा था तथा साथ में खाना खाने का जो आनंद था वो सभी समाप्त हो गया। उस समय यदि तकनीकी सुविधाओं को शिक्षा क्षेत्र में न अपनाया होता तो विद्यार्थियों के भविष्य की तैयारी में एक बड़ी रुकावट आ जाती। विषम परिस्थिति में पढ़ने-पढ़ाने के, सीखने-सिखाने के नए तरीक़ों से परिचय हुआ। ऑनलाइन माध्यम को अपनाकर विद्यार्थी घर बैठे अपने शिक्षकों से पढ़ सके और अभिभावकों की नज़रोंमें रहकर बहुत कुछ सीख सके। इस परिस्थिति में हमें पढ़ने-पढ़ाने, घर से काम करने के साथ ही और भी बहुत कुछ सीखने के अवसर मिले जैसे-...

धैर्य-दृढ़ता-कविता

तू धैर्य रख, तू धैर्य रख   मुश्किलें   हैं   परेशनियाँ   भी   तूफ़ान   हैं  तो  होंगी   आँधियाँ   भी     लेकिन   तू   ये   याद   रख     तू   धैर्य   रख ,  तू   धैर्य   रख       सफ़र   है   तो   कहीं   धूप   होगी   कभी   प्यास   कभी   भूख   होगी     तू   हिम्मत   के   साथ   ये   याद   रख     तू   धैर्य   रख ,  तू   धैर्य   रख       मार्ग   कठिन   है ,  पत्थर   पड़े   हैं   कहीं   काँटे   कहीं   गड्डे   गड़े   हैं   तू   ध्यानपूर्वक   पैर   रख     तू   धैर्य   रख ,  तू   धैर्य   रख