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मज़दूर दिवस पर कविता। labor day poem

 मज़दूर 

हैं कुछ लोग जो पढ़ नहीं पाते हैं
शिक्षा से वंचित से रह जाते हैं
और हम उनके शुभचिंतक...
जिनसे वे धिक्कार सा पाते हैं

हाँ सही है....पढ़ना सबको चाहिए
फिर ये कैसे पढ़ने से बच जाते हैं
और फिर हमारे लिए कभी घर बनाते हैं
कभी वातावरण स्वच्छ करने में योगदान दे जाते हैं

हमारे द्वारा वे कुछ खास आदर नहीं पाते हैं
पर फिर भी जीवन भर हमारे काम आते हैं
गलतफहमी है कि आलीशान मकान हम बनाते हैं
पूछे कोई उनसे किस कदर खून पसीना उसमें वो बहाते हैं

सच कहें तो स्वच्छता के नाम पर भी
हम बस नाम ही कर पाते हैं
कोई देखे उन्हें कैसे खुद की फिकर छोड़
वे गंदी नालियों में कूद जाते हैं
हम कहते हैं स्वच्छता में ईश्वर निवास करता है
उस निवास के लिए क्या हम उनका ऋण चुकाते हैं???



हैं कुछ लोग जो पढ़ नहीं पाते हैं
समाज में मजदूर कहलाते हैं
देखे कोई मजदूरी उनकी...
बहुत कम में हमें बहुत कुछ दे जाते हैं
हैं कुछ लोग जो पढ़ नहीं पाते हैं

Gunjan Rajput


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