बरसात की एक रात बारिश.....मुझे हमेशा से बारिश से थोड़ी सी नाराजगी रही है और क्यूँ न हो इसने कितनी बार मुझे जरूरी कामों के लिए देरी कराई है, कितनी बार मेरे बाहर जाने के प्लान को चौपट किया है, मेरे जीवन में इसकी अहम भूमिका रही है। मैंने सोचा नहीं था कि अचानक ये बारिश कुछ ऐसा कर देगी कि मेरी नाराज़गी एक दिन इसी में धूल जाएगी। बात 2 साल पहले की है जब मैं भोपाल से दिल्ली आ रही थी रात का सफर और ट्रेन में आरक्षण (reservation) न हो तो परेशानी तो होती ही है। मेरा जाना अगर जरूरी नहीं होता तो शायद कभी न जाती ऐसे; लेकिन क्या करें बॉस ने बहुत जरूरी काम के सिलसिले में छुट्टी खत्म होने के एक हफ्ते पहले ही बुला लिया था वो भी अचानक। खैर छोड़ो मैं घर से बहुत सारी हिदायतों की गठरी साथ बाँध कर निकल ही रही थी कि अचानक मेरी बहन तान्या ने बताया कि "दीदी आपका जाना आज मुश्किल लग रहा है मौसम खराब हो रहा है, बादल गरज रहे हैं बिजली चमक रही है ऐसे में बहुत परेशानी होगी जाने में। उसकी बात सुनकर मैंने एक बार ऊपर की ओर देखा फिर अपने फ़ोन की ओर, और मुझे याद आया कि रिया तेरा आज जाना बहुत ...