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मेरी गूँज (गुंजन राजपूत)

  मेरी गूँज (उपन्यास/NOVEL) 'मेरी गूँज' एक ऐसा उपन्यास जिसे पढ़ने वाला लगभग हर व्यक्ति अपनी झलक देख सकता है।  For oder fill fill the link below मेरी गूँज (गुंजन राजपूत) Meri goonj written by Gunjan Rajput

रिश्तों का बदलना। कविता।

 बदलाव  मैंने जो हक़ दिए थे तुम्हें वो आज वापस मेरे हवाले हैं मैंने फिर तुम पर तुम्हारी यादों पर लगाए कड़े ताले हैं कभी महफिलों में तुम्हें देख गले लगाने को तड़पते थे आज मुतमईन होकर तुमसे, हम कितने किस्मत वाले हैं तुम्हारे मिलने के वादे पर कितने खुश हो जाया करते थे ज़िंदगी के अपने कितने बरस हमने यूँ बेकार कर डाले हैं और तुम कहते हो कि हम अब कुछ बदल से गए हैं इस बदलाव के लिए 'गुंजन' ने सारे कलाम पढ़ डाले हैं  Instagram:gunjanrajput youtube:gunjanrajput pratilipi:gunjanrajput twitter:gunjanrajput

अब मोहब्बत नहीं रही। Heart breaks।

अब मोहब्बत नहीं    तुझसे अब मोहब्बत नहीं रही हाँ सच तुझसे अब मोहब्बत नहीं रही पर बेकरारी में करार आज भी तुझसे है तेरी यादें अब तंग नहीं करतीं हाँ सच तेरी यादें अब तंग नहीं करतीं पर इस अफरा-तफरी भरी ज़िन्दगी में सुकून तुझसे है तेरी फिक्र यूँ तो अब नहीं सताती मुझे हाँ सच तेरी फिक्र यूँ तो अब नहीं सताती मुझे पर अक्सर मेरे सभी ख्यालों का राब्ता तुझसे है अब ज़िन्दगी तेरे नाम पर रोक नहीं रखी मैंने हाँ सच अब ज़िन्दगी तेरे नाम पर रोक नहीं रखी मैंने पर तू चाहे मुझे और करे मिलने की नाकाम आरज़ू ये आस तुझसे है Instagram:gunjanrajput youtube:gunjanrajput pratilipi:gunjanrajput twitter:gunjanrajput  

तोहफ़े में किताब। Book for Gift

तोहफ़े में किताब  तुम मोहब्बत में मुझे एक किताब देना उस के आखिरी पन्ने पर अपने नाम के साथ मेरा नाम देना अपने नाम के साथ कुछ काँटे जरूर लगाना तुम कोई छुए तुम्हारे नाम को उसे एक ज़ख्म कमाल देना तुम मोहब्बत में मुझे एक किताब देना कुछ पंखुड़ियों के साथ छिपा देना मेरे तुम्हारे कुछ किस्सों को मैं जिस शाम खोलूँ किताब तुम यादों की महक हर उस शाम देना तुम मोहब्बत में मुझे एक किताब देना किताब के बीच अपनी मोहब्बत के कुछ अक्षर भी जरूर रख देना मैं पढूँ किताब तुम हर बार एक याद देना तुम मोहब्बत में मुझे एक किताब देना   Instagram:gunjanrajput youtube:gunjanrajput pratilipi:gunjanrajput twitter:gunjanrajput

खराब आदतें। poem on habits or bad habits

खराब आदतें  यूँ  नजदीक  बैठा  कर  उन्हें अपनी आदतें  खराब  न किया करो कुछ   दिन  के  मेहमान  हैं, चले जायेंगे तुम  अपना  वक्त  यूँ  बर्बाद  न किया करो वो आएंगे  प्यार  भरी बातें करेंगे उन   चार  बातों की  खातिर तुम   सब   कुछ  अपना  कुर्बान  न किया करो तुम्हें उतनी  जरूरत  भी नहीं होगी उन्हें जितनी   फिक्र  होगी तुम्हारी तुम   उस  झूठी  फिक्र  की  खातिर अपनी  तबियत   खराब  न किया करो वो चार दिन की चाँदनी दिखाएंगे फिर अँधेरी रात लाएंगे तुम उन काली रातों के लिए अपनी नींदें हराम न किया करो यूँ नजदीक बैठा कर उन्हें अपनी आदतें खराब न किया करो Instagram:gunjanrajput youtube:gunjanrajput pratilipi:gunjanrajput twitter:gunjanrajput

दिल रख लेते मेरा-कविता। sad poem

काश तुम दिल रख लेते मेरा  माना तुम्हें बारिश में भीगना बिल्कुल नापसंद है तुम छतरी में रह लेते दिल रख लेते मेरा माना तुम्हें छत पर तारे देखना बिल्कुल नापसंद है तुम खिड़की से झाँक लेते दिल रख लेते मेरा माना तुम्हें सड़क किनारे खड़े चाट खाना पसंद नहीं तुम कुछ खट्टी-मीठी चटनी घर ले आते दिल रख लेते मेरा और हाँ तुम्हें वो हर वक्त की मेरी पायल की झनकार भी कहाँ पसंद है तुम घुंघरू निकलवा कर पहना देते दिल रख लेते मेरा माना तुम्हें मेरा तुम पर यूँ हक़ जताना पसंद नहीं कभी-कभी तुम मेरे हो ये अहसास करा देते दिल रख लेते मेरा मेरा तुम्हें छोड़कर जाना तुम्हें हरगिज़ नापसंद था तुम अपने पास रोक लेते दिल रख लेते मेरा Instagram:gunjanrajput youtube:gunjanrajput pratilipi:gunjanrajput twitter:gunjanrajput

एक लड़की भीगी-भागी सी

  वेद ऑफिस से घर के लिए निकल चुका था, बारिश का मौसम था तो इन दिनों वो यही कोशिश करता कि समय से घर के लिए निकल जाया करे क्योंकि मौसम का कोई भरोसा नहीं। घर जाने के रास्ते में एक कैफे था जिसमें वेद अक्सर कॉफी पीने के लिए जाया करता था। मौसम की ठंडक और बारिश की बुहारों को देखकर उसका मन हुआ कि कॉफी पी ली जाए। कैफे में पहुँचा अपनी पसंदीदा टेबल पर बैठकर काफी का ऑर्डर दिया और हेडफोन्स से गाने सुनने लगा। वही पुराने गाने 19 के शतक के। गाने सुनते-सुनते नज़र बाहर गई तो देखा बारिश बढ़ गयी है। उसकी नज़र उसकी गाड़ी की तरफ गई तो देखा एक लड़की वहाँ गाड़ी के पीछे हल्के गुलाबी सूट में दुपट्टे से अपना सर ढके आते जाते ऑटो को रोकने की कोशिश कर रही है। वेद का ध्यान गया कि वहाँ पीछे इतनी जगह है कि वो वहाँ खड़े रह कर इंतज़ार कर सकती है पर फिर भी वो बारिश में भीगते हुए ऑटो रोक रही है तो हो सकता है कुछ जरूरी काम हो। इसी बीच वेद की कॉफी आ गई और वो फिर अपनी कॉफी और अपने गानों में खो गया। बारिश के तेज होने के कारण वेद काफी पीने के बाद भी वहाँ बैठा रहा और फिर एक बार उसी तरफ नज़र गई तो वो लड़की वहाँ नहीं दिखी, वेद ने सोचा च...

ज़िंदगी और मौत में ज़िंदगी को चुनने वाली कहानी

ज़िंदगी अनमोल है  आज राजीव का दिल चाह रहा था कि इस बेबस-बेचारगी से भरी जिंदगी को खत्म कर दे। कई दिनों से उसके साथ कुछ अच्छा नहीं चल रहा था। ऑफिस में बॉस कुछ दिनों से किसी न किसी बात पर राजीव के ऊपर नाराज़ हो रहे थे। राजीव जानता था कि उसका काम में ध्यान नहीं लग पा रहा है। वो हर काम में पूरा ध्यान लगाने की कोशिश करता लेकिन मानो दिमाग के अंदर बैठा कोई शैतान उसे काम करने ही नहीं देना चाहता था। ऊपर से उसकी प्रेमिका सावी के साथ रोज़ के बढ़ते झगड़ों की वजह से भी वो थोड़ा चिड़चिड़ा हो गया था। वो पहले ऐसे स्वभाव का नहीं था लेकिन पिछले साल जब उसने अपने हाथों से अपनी माँ का अंतिम संस्कार किया तब से राजीव खुद को बहुत अकेला महसूस करने लगा। अपना दुःख किसी को बता नहीं पाता, किसी के सामने आँखें गीली हो जाएँ तो "कुछ चला गया है" कहकर रूमाल के कोने से चुपके से आँखें पोंछ लेता। और इस अकेलेपन में उसे पता ही नहीं चला कि हमेशा खुश रहने वाले राजीव ने कब उसके अंदर दम तोड़ दिया और अब एक निराश, उदास और चिड़चिड़ा राजीव उसके अंदर था जो हर दिन नए संघर्ष कर रहा था। आज ऑफिस से आते समय घर से कुछ किलोमीटर दूर ही कैब से...

बरसात की रात

बरसात  की  एक  रात बारिश.....मुझे हमेशा से बारिश से थोड़ी सी नाराजगी रही है और क्यूँ न हो इसने कितनी बार मुझे जरूरी कामों के लिए देरी कराई है, कितनी बार मेरे बाहर जाने के प्लान को चौपट किया है, मेरे जीवन में इसकी अहम भूमिका रही है। मैंने सोचा नहीं था कि अचानक ये बारिश कुछ ऐसा कर देगी कि मेरी नाराज़गी एक दिन इसी में  धूल  जाएगी। बात 2 साल पहले की है जब मैं भोपाल से दिल्ली आ रही थी रात का सफर और ट्रेन में आरक्षण (reservation) न हो तो परेशानी तो होती ही है। मेरा जाना अगर जरूरी नहीं होता तो शायद कभी न जाती ऐसे; लेकिन क्या करें बॉस ने बहुत जरूरी काम के सिलसिले में  छुट्टी खत्म होने के एक हफ्ते पहले ही बुला लिया था वो भी अचानक। खैर छोड़ो मैं घर से बहुत सारी हिदायतों की गठरी साथ बाँध कर निकल ही रही थी कि अचानक मेरी बहन तान्या ने बताया कि "दीदी आपका जाना आज मुश्किल लग रहा है मौसम खराब हो रहा है, बादल गरज रहे हैं बिजली चमक रही है ऐसे में बहुत परेशानी होगी जाने में। उसकी बात सुनकर मैंने एक बार ऊपर की ओर देखा फिर अपने फ़ोन की ओर, और मुझे याद आया कि रिया तेरा आज जाना बहुत ...