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एक लड़की भीगी-भागी सी

 वेद ऑफिस से घर के लिए निकल चुका था, बारिश का मौसम था तो इन दिनों वो यही कोशिश करता कि समय से घर के लिए निकल जाया करे क्योंकि मौसम का कोई भरोसा नहीं। घर जाने के रास्ते में एक कैफे था जिसमें वेद अक्सर कॉफी पीने के लिए जाया करता था। मौसम की ठंडक और बारिश की बुहारों को देखकर उसका मन हुआ कि कॉफी पी ली जाए। कैफे में पहुँचा अपनी पसंदीदा टेबल पर बैठकर काफी का ऑर्डर दिया और हेडफोन्स से गाने सुनने लगा। वही पुराने गाने 19 के शतक के। गाने सुनते-सुनते नज़र बाहर गई तो देखा बारिश बढ़ गयी है। उसकी नज़र उसकी गाड़ी की तरफ गई तो देखा एक लड़की वहाँ गाड़ी के पीछे हल्के गुलाबी सूट में दुपट्टे से अपना सर ढके आते जाते ऑटो को रोकने की कोशिश कर रही है। वेद का ध्यान गया कि वहाँ पीछे इतनी जगह है कि वो वहाँ खड़े रह कर इंतज़ार कर सकती है पर फिर भी वो बारिश में भीगते हुए ऑटो रोक रही है तो हो सकता है कुछ जरूरी काम हो।

इसी बीच वेद की कॉफी आ गई और वो फिर अपनी कॉफी और अपने गानों में खो गया। बारिश के तेज होने के कारण वेद काफी पीने के बाद भी वहाँ बैठा रहा और फिर एक बार उसी तरफ नज़र गई तो वो लड़की वहाँ नहीं दिखी, वेद ने सोचा चलो शायद उसे ऑटो मिल गया होगा तो चली गई होगी। वो यही सोच रहा था इतने में उसने देखा कि वो लड़की भीगती हुई उसी कैफे की तरफ भागती हुई आ रही है। वेद ने एक कॉफी और ऑर्डर कर दी इस बार उसका ध्यान कॉफी और गानों से हटकर थोड़ा उस लड़की की तरफ भी जा रहा था। लड़की ने अपने लिए चाय का ऑर्डर दिया और बैठ गई उसे देखकर लग रहा था मानो किसी परेशानी में है। वेद की काफी खत्म होती इससे पहले वो लड़की वहाँ से चली गई।
कुछ रोज़ बाद संडे को घर बैठे-बैठे वेद बोर हो रहा था। उसने अपने दोस्त को घर बुलाया पर वो मौसम खराब होने की वजह से नहीं आया। वेद बारिश का मजा लेने गाड़ी लेकर थोड़ा घूमने के लिए निकल गया। रास्ते में देखा कि वही उस दिन वाली लड़की भीगी हुई सी खड़ी ऑटो का इंतजार कर रही है वेद ने सोचा लिफ्ट के लिए पूछ ले पर वो कुछ गलत न समझ ले ये सोचकर वेद आगे बढ़ गया। अगले दिन ऑफिस में वेद को इंटरव्यू लेने थे अपनी पर्सनल सेक्रेटरी के लिए तो सुबह जल्दी घर से निकल गया। कुछ 1-2 इंटरव्यू लेने के बाद जब अगले इंटरव्यू के लिए बेल बजाई तो कुछ देर बाद एक लड़की हाथ में फाइल दबाए अंदर आई। वेद को उसे पहचानने में देर नहीं लगी ये वही बारिश में भीगने वाली और ऑटो को रोकने वाली लड़की थी। इंटरव्यू के दौरान उसने बताया कि वो कुछ दिनों से नौकरी की तलाश में इधर उधर घूम रही है। शहर में नई है तो ज्यादा दोस्त नहीं हैं। वेद ने कुछ सोचते हुए पूछ लिया कि "अच्छा प्रिया! आपको बारिश पसंद है?" इस सवाल से प्रिया (वो लड़की) थोड़ा अचकचाते हुए बोली " ससस....सॉरी सर???" वो सवाल समझ नहीं पाई कि ये अचानक क्या पूछा? वेद ने फिर कहा " मिस प्रिया मैं पूछ रहा था आपसे कि क्या आपको बारिश पसंद है?" प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा "जी सर...बारिश किसे पसंद नहीं होती।" वेद ने धीरे से कहा इतनी धीरे कि प्रिया सुन न पाए-"अच्छा तभी आप सड़कों पर बारिश में भीगती हुई तो कभी भागती हुई नजर आती हैं।" प्रिया-" सॉरी सर कुछ कहा आपने???"  वेद ने कहा "नहीं कुछ नहीं।" थोड़ी और बातचीत की और उसे जाने को बोल दिया। अगले दिन वेद के ऑफिस से प्रिया को मेल गया जिसमें उसकी जॉब  का कंफर्मेशन था और उसका अपॉइंटमेंट लेटर। दो दिन बाद ही प्रिया ने ऑफिस आना शुरू कर दिया। वेद जब भी प्रिया को देखता उसे वही प्रिया नज़र आती जो हल्के गुलाबी सूट में सड़कों पर भीगी हुई इधर-उधर भाग रही थी।
एक शाम वेद ऑफिस से निकला और बारिश शुरू हो गई। वो थोड़ा आगे बढा ही था कि उसने देखा प्रिया ऑफिस के पासवाले ऑटो स्टैंड पर ऑटो का इंतजार कर रही है। वेद को वही दिन याद आ गया जब उसने प्रिया को पहली बार देखा था। वेद ने गाड़ी साइड में रोकी और प्रिया को कहा "मिस प्रिया आइए गाड़ी में बैठ जाइए मैं आपको छोड़ देता हूँ।" प्रिया को शायद थोड़ा अजीब लगा तो उसने मना कर दिया और कहा "सर आप परेशान मत होइए मैं चली जाऊँगी।" वेद ने मुकुराते हुए कहा "जी मिस प्रिया मैं जानता हूँ आप चली जाएँगी आपको यूँ बारिश में सड़कों पर भीगना काफी पसंद है पर चलिए आज मैं छोड़ देता हूँ आपको।" वेद के ऐसा कहने पर प्रिया थोड़ा संकोच करते हुए गाड़ी में बैठ गई। वेद ने मानसून के गाने लगा दिए और उससे उसका घर का पता पूछने लगा। रास्ते में वही कैफे पड़ा तो आदतानुसार वेद का काफी पीने का मन हुआ पर प्रिया साथ में थी तो कैसे पूछे प्रिया से इसलिए खामोश रहा। इतने में प्रिया ने पूछा "सर.....अगर आप लेट न हों तो क्या हम कुछ देर यहाँ बैठ सकते हैं? कॉफी पी लेते हैं।" वेद ने प्रिया को देखा और मन ही मन बहुत खुश हुआ कि ये तो प्रिया ने वेद के मन की बात बोल दी पर उसने थोड़ा सख्त लहजे में कहा प्रिया आप मेरी एम्पलॉई हैं मैं आपके साथ कॉफी नहीं पी सकता।" ये सुनकर प्रिया थोड़ा अचकचा गई और उसने तुरंत सॉरी बोलकर अपनी गलती की माफी माँग ली। फिर वेद ने हँसते हुए कहा- लेकिन मैं दोस्तों के साथ कॉफी पी लेता हूँ तो अगर आप मुझे अपना दोस्त समझें और ये सर-सर कहना बंद करें तो हम कॉफी पी सकते हैं।" प्रिया उसे देखने लगी और मुस्कुराते हुए बोली "ओके सर! चलते हैं"
वेद- "फिर सरररर....???"
प्रिया-" ओह्ह सॉरी सर! ओह्ह हो सॉरी वेद सर।
वेद ने थोड़ा बनावटी गुस्से में कहा- प्रिया.....वेद..वेद कहो।
प्रिया-" ओके वेवेवे....वेद। चलते हैं कॉफी पीने।
दोनों कैफे में गए और वेद ने प्रिया को उसी टेबल की तरफ चलने का इशारा किया और वहाँ जाकर बैठ गए। वहाँ बैठने के बाद प्रिया ने पूछा- वेद क्या इस टेबल में कुछ खासियत है आप यहीं बैठते हैं???" प्रिया की बात सुनकर वेद ने थोड़ा सवालिया नज़रों से प्रिया को देखते हुए कहा "तुम्हें कैसे पता मैं यहाँ बैठता हूँ???" प्रिया ने बताया कि उसने वेद की वहाँ पहले भी देखा है। उसने बताया कि एक दिन बारिश में ऑटो का इंतजार करते-करते थोड़ा थक गई थी तो चाय पीने आई थी तब उसने वेद को यहाँ देखा था। उसकी बात सुनकर वेद ने कहा " और उस दिन तुमने हल्के गुलाबी रंग का सूट पहना हुआ था।" प्रिया वेद को आश्चर्यचकित होकर देखती हुए मुस्कुराने लगी और हाँ में सर हिलाया। इतने में कॉफी आ गई और दोनों उस दिन को याद करते हुए बातें करते हुए काफी पीने लगे। वेद ने कहा "देखो मतलब हम पहले भी मिल चुके हैं और उस वक्त तुम मेरी एम्पलॉई नहीं थीं और न ही मैं तुम्हारा बॉस...तो क्या हम दोस्त बन सकते हैं? प्रिया ने कहा हाँ पर उसके लिए आपको कुछ करना पड़ेगा। वेद ने पूछा "और वो क्या?" प्रिया ने कहा चलिए बताती हूँ।
कैफे से निकले तो प्रिया ने कहा आपको भी बारिश पसंद है न...तो चलिए बारिश में भीगते हैं....वेद के पूछने पर कि कैसे??कहाँ??? प्रिया ने कुछ दूर एक चाय की टपरी की तरफ इशारा किया और कहा चलिए वहाँ चलकर चाय पीते हैं और गाड़ी से नहीं जाएंगे। वेद ने प्रिया की बात मान ली और दोनों बारिश में भीगते हुए चाय की टपरी की ओर चलने लगे। वेद ने प्रिया की तरफ देखा वो बारिश में भीगती हुई बड़ी धुली-धुली और बेहद खूबसूरत लग रही थी, आज उसके चेहरे पर वो परेशानी नहीं थी जो इससे पहले हमेशा वेद ने देखी थी। वेद उस भीगी-भागी लड़की को देखते हुए पता नहीं किन ख्वाबों में खो गया और पता नहीं कब उस भीगी-भागी लड़की का हाथ पकड़कर आगे का सफर करने लगा।

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