मैं संस्कृत और हिंदी की शिक्षिका के रूप में ज़्यादा नहीं लेकिन लगभग 8 वर्ष से कार्य कर रही हूँ। इतने दिनों में कई बच्चों से मिलना हुआ, कई अभिभावकों से मिलना हुआ और बहुत सारे शिक्षक-शिक्षिकाओं से मिलना हुआ। इतने दिनों में मैंने एक सवाल का काफ़ी बार सामना किया है और वो सवाल है- "आप शिक्षक by choice हैं या by chance"? मैंने हमेशा से इस सवाल के उत्तर में यही कहा है कि मैं by choice शिक्षक हूँ। और मुझे उन लोगों से भी शिकायत नहीं है जो by chance शिक्षक बन गए हैं। शिकायत तो उन लोगों से और उनकी मानसिकता से है जो आज भी ये सोचते हैं कि- अगर कुछ न कर सके तो शिक्षक बन जाएँगे। जो आज भी ये सोचते हैं कि सभी नौकरियों में सबसे अधिक सरल teacher बनना है तो ये उनकी गलत मानसिकता है। बहुत से लोग सोचते हैं कि- teacher की job सबसे कम समय की job होती है जबकि ऐसा नहीं है। लगभग सभी नौकरियों में एक teacher की job ऐसी job है जिसमें सबसे अधिक unpaid hours काम करना पड़ता है।
इसके साथ ही teachers वो होते हैं जो सिर्फ शिक्षा ही नहीं देते बल्कि आने वाले समाज का निर्माण करते हैं। और इस नए समाज को बनाने वाले जो विद्यार्थी होंगे उनके लिए बहुत आवश्यक है कि वो अपने गुरुओं का सम्मान करें। बच्चा अपने घर-परिवार में यादि अपने teacher की इज़्ज़त होते देखेगा तो वो खुद-ब-खुद अपने teacher की इज़्ज़त करेगा लेकिन यदि उसके घर में ही वो ऐसी बातें सुनता है कि teaching बस एक नौकरी है जैसी बाक़ी अन्य नौकरियाँ हैं तो वो अपने शिक्षकों का सम्मान कभी नहीं कर पाएगा। और अगर वो सम्मान नहीं कर पाएगा तो वो शायद एक पढ़ा-लिखा इंसान अवश्य बन जाए किंतु वो एक अच्छा इंसान बन सके अच्छा नागरिक बन सके इसमें सदैव संदेह रहेगा।
अतः हम सबकी ज़िम्मेदारी बनती है कि बच्चों के सामने अच्छे उदाहरण रखें जिससे वो अच्छी बातें सीख सकें और अच्छे नागरिक बन सकें।
इसके साथ ही teachers वो होते हैं जो सिर्फ शिक्षा ही नहीं देते बल्कि आने वाले समाज का निर्माण करते हैं। और इस नए समाज को बनाने वाले जो विद्यार्थी होंगे उनके लिए बहुत आवश्यक है कि वो अपने गुरुओं का सम्मान करें। बच्चा अपने घर-परिवार में यादि अपने teacher की इज़्ज़त होते देखेगा तो वो खुद-ब-खुद अपने teacher की इज़्ज़त करेगा लेकिन यदि उसके घर में ही वो ऐसी बातें सुनता है कि teaching बस एक नौकरी है जैसी बाक़ी अन्य नौकरियाँ हैं तो वो अपने शिक्षकों का सम्मान कभी नहीं कर पाएगा। और अगर वो सम्मान नहीं कर पाएगा तो वो शायद एक पढ़ा-लिखा इंसान अवश्य बन जाए किंतु वो एक अच्छा इंसान बन सके अच्छा नागरिक बन सके इसमें सदैव संदेह रहेगा।
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