Class 7 Hindi Bal Mahabharat summary and character introduction (कक्षा 7 हिंदी बाल महाभारत का सारांश तथा पात्र परिचय)
कक्षा 7 के लिए बाल महाभारत का संक्षिप्त सारांश तथा मुख्य पात्रों का परिचय-
बाल महाभारत का संक्षिप्त सारांश
महाभारत की शुरुआत राजा शांतनु और गंगा के पुत्र भीष्म से होती है। भीष्म ने अपने पिता की इच्छा के अनुरूप वचन लिया था कि वे आजीवन ब्रह्मचारी रहेंगे और हस्तिनापुर के सिंहासन के लिए कभी दावा नहीं करेंगे। गंगा के जाने के बाद शांतनु ने सत्यवती से विवाह किया, जिनसे धृतराष्ट्र और पांडु का जन्म हुआ। धृतराष्ट्र ने अंधेपन के कारण राज्य की गद्दी नहीं संभाली, और पांडु ने राज्य का शासन किया।
पांडु के पाँच पुत्र थे, जिन्हें पांडव कहा जाता है—युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव। पांडवों के सगे भाई कौरव थे, जिनकी संख्या १०० थी, और उनका सबसे बड़ा भाई दुर्योधन था। दुर्योधन का मन हमेशा पांडवों से ईर्ष्या और द्वेष से भरा रहता था।
दुर्योधन ने छल-कपट से पांडवों को उनके अधिकारों से वंचित कर दिया। उसने अपने मामा शकुनि की सहायता से जुए का षड्यंत्र रचा, जिसमें पांडव अपना सारा राजपाट हार गए। उन्हें तेरह वर्षों का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास भोगने के लिए विवश किया गया। जब अज्ञातवास समाप्त होने के बाद पांडवों ने अपना राज्य वापस माँगा, तो दुर्योधन ने देने से इनकार कर दिया। पांडव अपने राज्य को वापस पाने के लिए युद्ध के लिए तैयार हुए। इस युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया, जिसमें उन्होंने जीवन के उच्चतम आदर्श और कर्तव्य को बताया। श्रीकृष्ण ने अर्जुन को यह समझाया कि युद्ध धर्म का एक हिस्सा है और उसे अपने कर्तव्य को निभाना चाहिए। महाभारत का युद्ध १८ दिन तक चला और अंत में पांडवों की विजय हुई।
बाल महाभारत के मुख्य पात्रों का परिचय
1. श्रीकृष्ण: वे इस महाकाव्य के मार्गदर्शक और नीति के ज्ञाता हैं। अर्जुन के सारथी के रूप में उन्होंने गीता का उपदेश दिया और धर्म की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2. भीष्म पितामह: वे कुरु वंश के प्रधान और अद्भुत योद्धा थे। अपनी प्रतिज्ञा के कारण उन्होंने जीवनभर विवाह नहीं किया और हस्तिनापुर की सेवा में समर्पित रहे।
3. द्रौपदी: वे पांचाल नरेश द्रुपद की पुत्री थीं और पांडवों की पत्नी थीं। उनका चीरहरण महाभारत युद्ध का प्रमुख कारण बना।
4. दुर्योधन: वे धृतराष्ट्र और गांधारी के पुत्र तथा कौरवों के सबसे बड़े भाई थे। वे अत्यंत अहंकारी और अधर्म का समर्थन करने वाले थे।
5. युधिष्ठिर: वे पांडवों में सबसे बड़े और सत्यवादी थे। धर्मपरायणता के कारण वे धर्मराज के रूप में प्रसिद्ध थे।
6. भीम: वे अपनी बलशाली प्रकृति और गदा युद्ध में निपुणता के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने दुर्योधन और कौरवों से बदला लेने की प्रतिज्ञा ली थी।
7. अर्जुन: वे अद्भुत धनुर्धर और भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मित्र थे। उन्होंने महाभारत युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और गीता का उपदेश प्राप्त किया।
8. नकुल और सहदेव: ये पांडवों में सबसे छोटे थे और अश्व चिकित्सा तथा ज्योतिष विद्या में निपुण थे।
9. कर्ण: वे सूर्यदेव और कुंती के पुत्र थे, लेकिन उन्हें दुर्योधन का मित्र होने के कारण कौरवों की ओर से युद्ध करना पड़ा। वे महान योद्धा और दानवीर थे।
10. गुरु द्रोणाचार्य: वे कौरवों और पांडवों के गुरु थे और धनुर्विद्या में निपुण थे।
11. शकुनि: वे गांधारी के भाई और दुर्योधन के कुटिल सलाहकार थे। उन्होंने महाभारत युद्ध की पृष्ठभूमि तैयार की।
12. धृतराष्ट्र और गांधारी: धृतराष्ट्र कौरवों के पिता और गांधारी उनकी धर्मपत्नी थीं। धृतराष्ट्र जन्मांध थे और पुत्रमोह के कारण अन्याय का साथ दिया।
13. विदुर: वे धृतराष्ट्र के मंत्री और न्यायप्रिय व्यक्ति थे। वे हमेशा धर्म और सत्य की राह पर चले।
इन सभी पात्रों ने मिलकर महाभारत की अद्भुत कथा को गढ़ा, जिसमें धर्म-अधर्म, सत्य-असत्य, और कर्तव्य के गूढ़ संदेश निहित हैं।
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