पर्यावरण के ऊपर कविता
कदम बढ़ाया जाए
देख दुर्गति पर्यावरण की
बेमौसम कई बार रोती है प्रकृति
अब प्रकृति माँ को और न सताया जाए
अभी समय है कदम बढ़ाया जाए
ये नालों से आती दुर्गंध
ये नदियों में पानी से अधिक अपविष्ट जल
ये कारख़ानों के धुएँ से बदतर होता जीवन
इस बेतमीज़ी पर इस बेसलूकी पर
अब रोक लगाया जाए
अभी समय है कदम बढ़ाया जाए
सावन आता है
कुछ धूल धो जाता है
प्रकृति को नहलाकर
फिर नया रुख़ दे जाता है
इस साफ़-सफ़ाई के दौर को
आगे भी चलाया जाए
अभी समय है कदम बढ़ाया जाए
हमने भी कुछ प्रयास किए हैं
प्लास्टिक प्रयोग कम किए हैं
नन्हे-नन्हे पौधों लगा
तितलियों के पंखों को रंग दिए हैं
ऐसे प्रयासों पर थोड़ा और
ध्यान लगाया जाए
अभी समय है कदम बढ़ाया जाए
@गुंजन राजपूत
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