शिक्षा और शिक्षक, भाषण
ओम् स्वस्ति पन्थामनु चरेम सूर्याचन्द्रमसाविव।पुनर्ददताघ्नता जानता सङ्गमेमहि।।शिक्षक होने का पहला कर्तव्य ये है कि हम सन्मार्ग पर चलने वाले बनें तथा अपने से जुड़े लोगों को तथा अपने विद्यार्थियों को सही रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करें और जैसे सूर्य और चंद्रमा अपनी गति नहीं भूलते हैं/ अपना रास्ता नहीं भूलते हैं/ अपना लक्ष्य नहीं भूलते हैं वैसे ही हम भी सदा अपना ध्येय स्मरण रखें।
कोई भी व्यक्ति पूरी तरह से निपुण कभी नहीं होता बड़ी बात ये होती है कि वो निपुणता प्राप्त करने के लिए कितने प्रयास कर रहा है।
यहाँ हमारा एक मात्र उद्देश्य है कि हमारे विद्यार्थी अधिक से अधिक सीखें, सही शिक्षा प्राप्त करें तथा उत्तम नागरिक बनें जिससे समाज का आगे चलकर कुछ भला कर सकें।इसके लिए आवश्यक है कि हमारी कक्षाएँ छात्रों पर केंद्रित हों/ उनके विकास पर केंद्रित हों।
ऐसी कक्षा हो जिसमें भिन्न-भिन्न प्रकृति के छात्रों को सीखने के लिए भिन्न-भिन्न तरीके मिलें जिससे प्रत्येक छात्र किसी न किसी तरीके को अपनाकर ज्ञान प्राप्त करे और आगे बढ़ सके। कक्षा में आने वाले प्रत्येक शिक्षक का ये कर्तव्य होता है कि वह न सिर्फ पुस्तकों का ज्ञान छात्रों तक पहुँचाए बल्कि जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण जानकारी से भी छात्रों को अवगत करे। उनमें ऐसी आदतों को विकसित करने में समर्थ हो जिससे छात्र अपने जीवन में किसी भी परिस्थिति में बिना डरे पूरे विवेक से/ धैर्य से सही निर्णय ले सकें। उदाहरण के लिए यदि संभव हो सके तो कक्षाएँ ऐसी बनाई जाएँ जिनमें प्राकृतिक प्रकाश आता हो, छात्रों को बिजली की आवश्यकता न पड़े।
छात्र कक्षा से बाहर जाते समय इस बात का ध्यान रखें कि सभी ए०सी०, पंखे तथा बल्ब बंद हों। इनके अलावा बिजली जैसे भी बचाई जा सके उसे बचाया जाए।
शिक्षकों के लिए ये भी आवश्यक है कि वे ये सुनिश्चित करें कि कक्षा के सभी छात्र स्वयं को एक ज़िम्मेदार नागरिक मानते हों तथा अपनी ज़िम्मेदारी समझते हों।
इसके साथ ही हमें ये भी समझना होगा कि ये आवश्यक है कि विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच मर्यादित दूरी रहे किंतु इसके साथ ही हम बच्चों के इतने सरल भी रहें कि यादि किसी विद्यार्थी के मन में किसी प्रकार का कोई प्रश्न है अथवा कोई शंका है तो वो खुल के अपने शिक्षक के समक्ष रख पाए। बिना इस बात की फ़िक्र करे कि उसकी बात सुनकर शिक्षक द्वारा कोई। पूर्वानुमान (judgement) लगाया जाएगा।
छात्र कक्षा से बाहर जाते समय इस बात का ध्यान रखें कि सभी ए०सी०, पंखे तथा बल्ब बंद हों। इनके अलावा बिजली जैसे भी बचाई जा सके उसे बचाया जाए।शिक्षकों के लिए ये भी आवश्यक है कि वे ये सुनिश्चित करें कि कक्षा के सभी छात्र स्वयं को एक ज़िम्मेदार नागरिक मानते हों तथा अपनी ज़िम्मेदारी समझते हों।
हर बच्चा विशेष
सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी
हमारी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी होती है कि हमें देखकर तथा हमारे आचरण को देखकर बच्चा सीखता है और अपना जीवन बनाता है। तो हमारे द्वारा ऐसा कोई कार्य न हो जिससे किसी के ऊपर कोई गलत प्रभाव पड़े।
इसीलिए प्राचीन काल से एक बच्चे के लिए उसके माता-पिता तथा गुरूजनों को देवताओं का दर्जा दिया जाता रहा है।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
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