हिंदी सुलेख कक्षा 3-5
विद्यार्थी जीवन और चरित्र निर्माण
विद्यार्थी जीवन और चरित्र जीवन विद्यार्थी जीवन मनुष्य की आधारशिला है। यह व्यवस्था है जब व्यक्ति के चरित्र को सुंदर आकार देना संभव होता है। विद्यार्थी कच्ची मिट्टी के समान होते हैं, उसे जिस आकार में ढाला जाए, ढल जाते हैं। यह अवस्था निकल जाने पर उस आकार में परिवर्तन नहीं लाया जा सकता जैसे मिट्टी का बर्तन पक जाने पर उसके आकार को बदला नहीं जा सकता। चरित्र निर्माण मनुष्य जीवन की सफलता के लिए अत्यधिक आवश्यक है और इसमें शिक्षक, अभिभावक तथा विद्यालय का वातावरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि कोई भी कड़ी कमजोर रह गई, तो व्यक्तित्व रूपी इमारत मजबूत और खूबसूरत नहीं बन सकती। सच्चाई, ईमानदारी, दृढ़ विश्वास, परिश्रम एवं कर्मठता जैसे मानवीय मूल्यों की स्थापना एक व्यक्तित्व को निखार देती है और ऐसा व्यक्ति न केवल परिवार अपितु समाज व देश के लिए बहुमूल्य सौगात बन जाता है। अतः एक स्वस्थ देश के निर्माण के लिए शिक्षा की ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जो छात्रों में नैतिक मूल्यों का विकास कर सके। छात्र सुनकर नहीं, देखकर अधिक सीखते हैं। अध्यापकों तथा अभिभावकों को छात्रों के समक्ष आदर्श प्रस्तुत करने चाहिए जिनसे प्रेरित होकर छात्रों का चरित्र निर्माण स्वयः होगा तथा समाज व देश का भविष्य उज्ज्वल बनेगा।
हिंदी सुलेख कक्षा 6-10
विद्यार्थी और अनुशासन
अनुशासन का अर्थ है-आत्मानुशासन अर्थात् स्वतः प्रेरणा से शासित होना। प्रकृति का समस्त कार्य-व्यापार अनुशासन की सूचना देता है। नियमित जीवन जीने का प्रयत्न ही अनुशासन है। अनुशासन किसी वर्ग या आयु विशेष के लोगों के लिए ही नहीं, अपितु सभी के लिए परम आवश्यक होता है। विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का विशेष महत्त्व है। जो विद्यार्थी जीवन में उचित अनुशासन में रहकर समय व्यतीत करता है, उसका जीवन-क्रम एक ऐसे व्यवस्थित तथा सफल मार्ग पर चलने का अभ्यस्त हो जाता है कि वह विद्यार्थी जीवन में सफलता और सम्मान तो पाता ही है, भविष्य के लिए मार्ग निर्धारण में भी सफल होता है। अनुशासन विद्यार्थी के जीवन में व्यवस्था का वातावरण बनाता है।
इससे नियमित रूप से कार्य करने की क्षमता का विकास होता है। अनुशासन द्वारा कर्तव्य और अधिकार का समुचित ज्ञान होता है। यह एक ऐसा गुण है जिससे मनुष्य सर्वप्रिय बन जाता है। वास्तव में विद्यार्थियों के लिए अनुशासन एक महत्त्वपूर्ण जीवन-मूल्य है। इसके अभाव में विद्यार्थी का जीवन शून्य बन जाता है। अपने भावी जीवन को आनंदमय बनाने के लिए विद्यार्थियों के लिए यह अति आवश्यक है कि वे अनुशासन में रहें। अनुशासन और सफलता का बड़ा घनिष्ठ संबंध है। जहाँ अनुशासन है, वहीं सफलता है और जहाँ अनुशासनहीनता है, वहाँ असफलता है।
चित्र वर्णन
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