एक आख़िरी सलाम 2025 के नाम
साल 2025 तुम्हारे इस सफ़र की समाप्ति पर तुमसे कुछ कहना है- इस साल तुमने जो भी सीख दी उसके लिए धन्यवाद देना है। लेकिन तुमने सिर्फ़ सीख नहीं दी, इस साल कुछ नए संघर्ष दिखाए, कुछ छोटे-छोटे लक्ष्य पूरे हुए तो कुछ बड़े-बड़े लक्ष्य पीछे छूट गए। कई मौके ऐसे आए जिन पर ख़ुद पर भरोसा और बढ़ गया तो कई मौक़े ऐसे भी थे जहाँ ऐसे झटके लगे कि भरोसा नहीं हुआ कि ज़िंदगी ऐसी भी चीज़ें दिखाती है। आगे सफ़र में भी कुछ न कुछ सीखना लगा ही रहेगा लेकिन जो इस सफ़र में सीखा उसकी सीख आगे काम ज़रूर आएगी। ये सफ़र की समाप्ति नहीं बस एक नए मोड़ की शुरुआत है।-
2025 का ये सफ़र ख़त्म हो गया धीरे-धीरे
एक नई उम्मीद के साथ आ रहा है 26 धीरे-धीरे
मैंने जो लक्ष्य सोचे थे सभी, पूरे करने को ज़िंदगी में
कुछ हो गए पूरे तो कुछ रह गए अधूरे धीरे-धीरे
संघर्ष ज़िंदगी के यहाँ ख़त्म कहाँ होते हैं
कुछ का मुक़ाबला कर लिया मैंने, कुछ तैयार हो रहे धीरे-धीरे
हाँ कुछ नए लोगों से मुलाक़ात भी हुई इस सफ़र में
तो कुछ पीछे छूट गए, कुछ छूट रहे हैं अब धीरे-धीरे
कुछ ज़िम्मेदारियों को पूरी सजगता के साथ पूरा किया है मैंने
कुछ में कुछ चूक रह गई, समय हाथ से फिसल गया धीरे-धीरे
ये सफ़र का आना जाना तो लगा रहता है ज़िन्दगी में
घड़ी की सुइयाँ कहाँ रुकती हैं, वह चलती रहती हैं धीरे-धीरे
ऐसे ही जब हाथ से फिसलता है समय
तब अंदाज़ा नहीं होता 'गुंजन'
ग़लतियाँ तब मलाल करवाती हैं धीरे-धीरे
समय की क़ीमत पता चलती है धीरे-धीरे
'धन्यवाद'
'धन्यवाद'

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आपका बहुत-बहुत धन्यवाद....🙏🏻🙏🏻🙏🏻